सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और घटनाओं से उठे कई सवाल
सावन के महीने में निकाली जाने वाली कांवड़ यात्रा सनातन धर्म की एक प्राचीन परंपरा रही है। यह यात्रा श्रद्धा, संयम और भक्ति का प्रतीक मानी जाती है। लेकिन बीते कुछ वर्षों से कांवड़ यात्रा की तस्वीरें और वीडियो कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं।
इस साल भी सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जिन्होंने इस धार्मिक यात्रा की पवित्रता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दो महिलाएं कांवड़ यात्रा के दौरान ट्रकों पर चढ़कर अश्लील गानों पर डांस कर रही हैं। DJ की तेज़ आवाज़ पर नाचती इन महिलाओं के चारों ओर भीड़ तालियां बजा रही है, मोबाइल निकालकर वीडियो बना रही है – और यह सब हो रहा है शिवभक्ति के नाम पर।
CRPF जवान की पिटाई, गाड़ियों की तोड़फोड़ – ये कैसी भक्ति?
भक्ति के नाम पर केवल डांस ही नहीं, हिंसा और अराजकता भी देखने को मिल रही है। मिर्जापुर रेलवे स्टेशन पर टिकट को लेकर विवाद के बाद कुछ कांवड़ियों ने एक CRPF जवान को उसके बच्चे के सामने बेरहमी से पीट दिया। वर्दीधारी जवान को जमीन पर पटककर लात-घूंसे मारे गए।
रेलवे पुलिस के अनुसार, इस मामले में 7 कांवड़ियों को गिरफ्तार किया गया है। इस घटना से साफ है कि कुछ लोगों की ‘भक्ति’ अब उन्माद में बदल चुकी है।
सहारनपुर से हरिद्वार तक – बढ़ती घटनाएं और गिरती मर्यादा
सहारनपुर में एक इनोवा कार से मामूली टक्कर के बाद कांवड़ियों ने कार को पूरी तरह तोड़ दिया। वहीं हरिद्वार में चश्मा लेने को लेकर दुकानों में तोड़फोड़ की गई। पुलिस की मौजूदगी में हुए इन घटनाओं ने कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोशल मीडिया पर आई प्रतिक्रियाएं – भक्ति या बर्बादी?
वायरल वीडियो पर लाखों व्यूज़ और हजारों कमेंट्स सामने आए हैं। एक यूजर ने लिखा – “गांजा के नशे में मस्त हैं ये भक्त, ये सनातन नहीं हनन है।” वहीं एक अन्य ने सवाल उठाया – “क्या यही है मोदी और योगी राज में भक्ति?”
कुछ लोगों ने इसे साजिश बताया। समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन ने कहा कि कुछ ‘बवाली तत्व’ कांवड़ यात्रा में घुसकर इसे बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से जांच की मांग की है।
क्या अब ‘भक्ति’ भी एक TikTok रील बन चुकी है?
कांवड़ यात्रा को हमेशा व्रत, संयम और तपस्या का मार्ग माना गया है। लोग प्याज-लहसुन तक का त्याग करते हैं। लेकिन अब कई जगहों पर गालियां, नाच-गाने, और डीजे की भरमार देखी जा रही है।
यह सवाल अब गहराने लगा है –
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क्या शिवभक्ति अब सिर्फ एक दिखावा बन चुकी है?
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क्या धार्मिक भावनाएं आहत करने वालों पर कोई कार्रवाई होगी?
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क्या प्रशासन की लापरवाही इस अराजकता की जिम्मेदार है?
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और सबसे बड़ा सवाल – क्या हम सनातन धर्म को स्वयं बदनाम कर रहे हैं?
धर्म की मर्यादा कौन तय करेगा?
भक्ति का मार्ग हमेशा संयम और साधना का रहा है। जब कांवड़ यात्रा में डीजे, शराब, अश्लीलता और हिंसा घुस आए तो ज़िम्मेदार कौन है?
क्या ये भक्त हैं या भीड़ के पीछे छुपे हुड़दंगी?
इस रिपोर्ट का मकसद किसी की आस्था पर सवाल उठाना नहीं, बल्कि यह दिखाना है कि कहीं आस्था के नाम पर अराजकता का नया चेहरा तो नहीं गढ़ा जा रहा।
भोले की भक्ति में शांति हो, संयम हो,
ना हो अश्लीलता, ना कोई तांडव हो…
जो शिव की राह चले, वो शिव सा सरल हो,
ना दिखावा करे, ना धर्म का छलावा हो…
लेखक: बी.एल. मान | आपका क्या कहना है? नीचे कमेंट सेक्शन में ज़रूर बताएं और ऐसे लेखों के लिए हमें फॉलो करें।










