तीखी खबर: सतना एयरपोर्ट की 300 पन्नों की फाइल गायब नहीं, दफन की गई है — ताकि घोटाले ज़िंदा न हो जाएं!
अधिकारियों की चुप्पी, रिकॉर्ड का गायब होना और सवाल जो अब नज़रें चुराने लगे हैं
सतना | सतना हवाई अड्डे से जुड़ी 300 से ज्यादा पन्नों की फाइल 1997 में कमिश्नर कार्यालय भेजी गई — और वहीं से उसका नामोनिशान मिट गया। यह कोई मामूली कागज नहीं था। इसमें दर्ज था एयरपोर्ट की जमीन का सच, अवैध आवंटन की परतें, और वो दस्तावेज जो सत्ता के गलियारों तक सनसनी फैला सकते थे।
अब सेवानिवृत्त डिप्टी कलेक्टर का बयान सामने आता है — साफ कहते हैं, “अगर ये फाइल मिल जाए, तो हवाई अड्डे के नाम पर हुए खेल की चक्की घूमने लगेगी।”
लेकिन क्या सिस्टम चाहता है कि यह चक्की कभी चले?
फाइल में दर्ज थे अधिग्रहण के 50 पन्ने, विन्ध्य प्रदेश काल के इत्तलाबी रजिस्टर, और उसके बाद की हर नोटिंग — लेकिन अब कुछ नहीं है, सिवाय चुप्पी और खोखली जांच के वादों के।
क्या 15 अगस्त से ठीक पहले गायब हुई ये फाइल सिर्फ एक ‘तारीखी इत्तेफाक’ है? या फिर ये देशभक्ति के नारों के बीच दबा दिया गया सच था, जिसे कोई उजागर नहीं करना चाहता?
फाइल नहीं मिल रही — लेकिन उसकी गुमशुदगी से जो बदबू आ रही है, वो पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर रही है।
कागज गुम हैं, लेकिन साजिश की स्याही अब भी गीली है।
और हां, अगर फाइल नहीं मिली — तो सवाल उठेंगे, और इस बार ज्यादा तीखे होंगे।












