राजस्थान पुलिस के जवानों ने किया होली का बहिष्कार, वेतन विसंगति और प्रमोशन में देरी को लेकर जताया विरोध

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जयपुर: राजस्थान पुलिस के जवानों ने इस बार होली का बहिष्कार कर दिया। न पुलिस लाइन में रंग उड़े, न थानों में गुलाल खेला गया। पुलिसकर्मियों ने वेतन विसंगति और डीपीसी (Departmental Promotion Committee) में देरी को लेकर विरोध जताया। वहीं, दूसरी ओर पुलिस के बड़े अधिकारी डीजे पर जश्न मनाते नजर आए।

वेतन और प्रमोशन को लेकर नाराजगी

राजस्थान पुलिस विभाग में पारंपरिक रूप से होली धुलंडी के अगले दिन मनाई जाती है, लेकिन इस बार थानों और पुलिस लाइन में कोई उत्सव नहीं दिखा। पुलिसकर्मियों का कहना है कि वे दिन-रात ड्यूटी करते हैं, लेकिन उनकी वेतन संरचना अन्य सरकारी विभागों के मुकाबले बेहद कम है।

वर्तमान में राजस्थान पुलिस में सिपाही का प्रारंभिक वेतनमान ₹5200-₹20200 और ग्रेड पे ₹1900 है। 9 साल की सेवा के बाद पहली पदोन्नति पर यह बढ़कर मात्र ₹2000 होती है।

तुलना करें तो:

  • पटवारी को पहली पदोन्नति पर ₹3200 ग्रेड पे मिलता है।
  • कनिष्ठ लिपिक को ₹2400 ग्रेड पे।
  • दूसरी पदोन्नति पर सिपाही जब एएसआई बनता है, तो उसकी ग्रेड पे ₹2400 होती है, जबकि पटवारी नायब तहसीलदार बनकर ₹3600 और कनिष्ठ लिपिक कार्यालय सहायक बनकर ₹3200 ग्रेड पे प्राप्त करता है।
  • 27 साल की सेवा के बाद सिपाही जब उप-निरीक्षक बनता है, तो उसकी ग्रेड पे ₹3600 होती है, जबकि तहसीलदार ₹4200 और कार्यालय अधीक्षक ₹3600 ग्रेड पे पाते हैं।

पुलिसकर्मियों की नाराजगी, नेताओं के बयान

पुलिसकर्मियों ने कहा कि अन्य सरकारी विभागों की तुलना में उन्हें कम वेतन और प्रमोशन में देरी का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि डीपीसी की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और समय पर प्रमोशन दिया जाना चाहिए।

विरोध को देखते हुए भाजपा नेता किरोड़ी लाल मीणा ने ट्वीट कर कहा, “राजस्थान पुलिसकर्मियों की मांगें मुख्यमंत्री तक पहुंचाकर उन्हें पूरा कराने का प्रयास करूंगा।”

वहीं, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा, “पुलिसकर्मी दिन-रात सेवा में लगे रहते हैं, लेकिन सरकार की नीतियों की वजह से वे अपने हक के लिए लड़ने को मजबूर हैं। मुख्यमंत्री को तुरंत इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए।”

अफसरों की होली, जवानों का विरोध

जहां पुलिसकर्मी होली नहीं मना रहे थे, वहीं बड़े अधिकारियों की होली पार्टियां सुर्खियों में रहीं।

एक पुलिसकर्मी ने कहा, “हम हर त्योहार पर ड्यूटी करते हैं, लेकिन जब हमारी बारी आती है, तो हमें ही नजरअंदाज कर दिया जाता है।”

क्या पुलिसवालों की सुनेगी सरकार?

अब सवाल उठता है कि क्या राजस्थान पुलिस के जवान ऐसे ही अपने हक के लिए लड़ते रहेंगे या सरकार उनकी मांगों पर ध्यान देगी? क्या डीपीसी को पारदर्शी बनाया जाएगा? क्या वेतनमान की विसंगति दूर होगी?

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