जनता चुनेगी ‘अपना अध्यक्ष’, शिव ‘राज’ में बदली थी, अब नगरीय निकाय चुनाव में ‘मोहन’ की नई व्यवस्था 

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( अंकित सेन /उजला दर्पण )

निकायों के अध्यक्ष जनता चुनती थी। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सरकार ने अप्रत्यक्ष प्रणाली लागू की तब चुने हुए पार्षद चुनते थे अपना अध्यक्ष, अब मोहन राज में फिर बदलने जा रही निकाय अध्यक्ष चुनाव की व्यवस्था…

भोपाल नगर पालिका और नगर परिषद चुनावों में भी अब नगर निगम के महापौर की तरह जनता सीधे अध्यक्ष चुन सकेगी। अध्यक्षों का निर्वाचन प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने के लिए विधानसभा सत्र में विधेयक लाया जाएगा। तब तक मौजूदा अध्यक्षों को अविश्वास प्रस्तावों के जरिए भी नहीं हटाया जा सकेगा। अगली कैबिनेट में इसका अध्यादेश लाया जाएगा। इसमें अविश्वास प्रस्ताव की अवधि को 3 साल से बढ़ाकर साढ़े चार साल किया जा सकता है।

सीएम डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में भोपाल में हुई कैबिनेट में यह अहम निर्णय लिया गया। स्थानीय निकायों में अध्यक्षों का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराने संबंधी व्यवस्था पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री व कई मंत्रियों ने माना कि इस व्यवस्था में धन-बल को बढ़ावा मिल रहा है। प्रेशर पॉलिटक्स होती है। कई बार स्थिति अराजक हो जाती है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा-सरकार सुधार करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

इसलिए पड़ी जरूरत

कई नगर पालिका और नगर परिषद में कलह सामने आ रही है। हाल ही में देवरी में अध्यक्ष को हटाया गया। अब शिवपुरी नपा में भाजपा के ज्यादातर पार्षद अध्यक्ष के खिलाफ उतरे। अविश्वास प्रस्ताव लाने की चेतावनी दी। सरकार ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की अवधि 2 से बढ़ाकर 3 साल की, पर अवधि पूरी होते ही कलह सामने आ रहे हैं।

शिवराज सरकार ने बदली थी व्यवस्था, फिर बदलने जा रही

2014 तक निकायों के अध्यक्ष जनता चुनती थी। इसे तत्कालीन शिवराज सरकार ने बदलकर अप्रत्यक्ष प्रणाली लागू की। इसमें चुने हुए पार्षदों को अध्यक्ष चुनने का अधिकार मिला। बीच में तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने इसे बदलने का प्रयास किया, लेकिन तब तक कांग्रेस की सरकार गिर गई। अब मोहन सरकार इसे पलटने जा रही है।

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