जयपुर, 10 दिसंबर। प्रवासी राजस्थान दिवस के अवसर पर सीतापुरा जेईसीसी में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में शिक्षा, निवेश और अवसरों पर केंद्रित विशेष सत्र हुआ। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि प्रवासी राजस्थानियों ने वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है और अब समय है कि वे अपनी विशेषज्ञता को मातृभूमि के विकास से जोड़ें। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में ज्ञान ही सबसे बड़ी पूंजी है और शिक्षा, कौशल, नवाचार व अनुसंधान आधुनिक अर्थव्यवस्था के चार स्तंभ हैं, जिन पर राजस्थान तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने राज्य में शिक्षा ढांचे के व्यापक विस्तार का उल्लेख करते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों में 71 नए राजकीय महाविद्यालय, 21 पॉलिटेक्निक कॉलेज और 177 नए भवनों का शुभारंभ किया गया है। साथ ही विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी, विज्ञान–गणित किट, सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनें आदि उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि अर्ली कैरियर प्रोग्राम ‘टेकबी’, आई-स्टार्ट प्रोग्राम और नई स्टार्टअप पॉलिसी के माध्यम से युवाओं को कौशल व नवाचार से जोड़ने के नए अवसर उपलब्ध हुए हैं।
सत्र की अध्यक्षता करते हुए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि राजस्थान सदैव शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी रहा है। उन्होंने नई शिक्षा नीति को विद्यार्थियों को प्रोडक्ट नहीं बल्कि व्यक्तित्व बनाने का माध्यम बताया। उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होने से प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। शिक्षामंत्री मदन दिलावर ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का आधार बताते हुए भामाशाहों और प्रवासी राजस्थानियों से शिक्षा में निवेश की अपील की।
अतिरिक्त मुख्य सचिव कुलदीप रांका ने प्रस्तुति देकर उच्च व स्कूल शिक्षा के नवाचारों, मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान, प्रखर राजस्थान, बहुभाषी शिक्षा और एआई टूल्स से सीखने की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने स्कूल भवनों को हालिया मानसून से हुए नुकसान का उल्लेख कर इनके पुनर्निर्माण में सहयोग की अपील की।
पैनल डिस्कशन में एमिटी यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. असीम चौहान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति जैसा विजनरी सुधार पिछले 40 वर्षों में नहीं देखा गया। फिजिक्सवाला के सह-संस्थापक प्रतीक माहेश्वरी ने डिजिटल एजुकेशन की भूमिका को रेखांकित किया। IIT जोधपुर के निदेशक अविनाश अग्रवाल ने स्टार्टअप इकोसिस्टम की आवश्यकताओं पर बात की, जबकि उद्योगपति आनंद राठी ने कौशल विकास के छोटे कोर्स शुरू करने का सुझाव दिया। बिट्स पिलानी के प्रो. वी. रामगोपाल राव ने एक्सपीरियन्शियल लर्निंग की जरूरत बताई और IIM उदयपुर के निदेशक अशोक बनर्जी ने आइडिया-ड्रिवेन शिक्षा व एंटरप्रेन्योरशिप माहौल की आवश्यकता पर जोर दिया।
यह सत्र शिक्षा क्षेत्र में निवेश, नवाचार और भविष्य की संभावनाओं पर केंद्रित रहा, जिसमें विशेषज्ञों ने कहा कि आज उपलब्ध अवसर पिछले कई दशकों से कहीं अधिक हैं और राजस्थान इन संभावनाओं को तेज गति से आत्मसात कर रहा है।










