पीएमओ ने एक ही महिला चिकित्सक को दो जगहों पर करवाई ड्यूटी, दोनों जगह से उठाया भुगतान

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चित्तौड़गढ़, (संवाददाता गोपाल चतुर्वेदी की रिपोर्ट), जिले के सबसे बड़े चिकित्सालय जिला राजकीय श्री सांवलिया जी चिकित्सालय के पीएमओ डॉक्टर दिनेश वैष्णव जब से चिकित्सालय के पीएमओ बने हैं तब से लेकर आज तक लगातार वह किसी ने किसी तरह से विवादों में रहे हैं और विगत के वर्षो की अगर बात की तो छोटे-मोटे आरोप पर भी पर छोटे कर्मचारीयों पर कारवाही करने से नहीं कतराते हैं, लेकिन जब बात स्वयं पीएमओ डॉ दिनेश वैष्णव की हो तो वह सरकार बदलने के साथ ही अपने आप को नेताओं के सामने नतमस्तक कर देते हैं, पहले कांग्रेस और अब राज बदलने के साथ भाजपा के कुछ नेताओं के सामने नतमस्तक है,

वही डॉक्टर वैष्णव का एक मामला सामने आ रहा है जिसमें एक चिकित्सक को उपकृत करने से भी वह नहीं चुके, जिला चिकित्सालय में ड्यूटी होने के बावजूद भी दूसरे स्थान पर चिकित्सक की ड्यूटी लगा दी, इस पूरे मामले में खास बात यह है कि महिला चिकित्सक को दोनों ही जगह पर कार्य करने का भुगतान भी किया गया है और जब यह मामला चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने विधानसभा में उठाया तब पूरे मामले की जांच हुई और मामले में पीएमओ डॉ दिनेश वैष्णव को स्पष्टीकरण देने के लिए 15 दिन का समय दिया गया, इसमें खास बात यह है कि करीब 3 महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी अभी तक डॉक्टर वैष्णव पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि नोटिस में एक तरफ कार्यवाही करने की चेतावनी भी दी गई थी l

वही शासन उप सचिव अनुपम कायल की ओर से जारी नोटिस के अनुसार प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर वैष्णव के विरुद्ध राजस्थान सिविल सेवा अधिनियम 1958 के नियम 16 के अंतर्गत अनुशासनात्मक जांच कार्यवाही किए जाने का निर्णय लिया गया था,इस संबंध में 15 दिन के भीतर लिखित में कथन पेश करने को कहा गया था l

वहीं अगर सूत्रों की माने तो करीब 90 दिन से अधिक बीत जाने के बाद भी मामले में डॉक्टर वैष्णव पर कोई कार्रवाई नहीं किया जाना कहीं ना कहीं राजनीतिक संरक्षण को दर्शाता है, जिसमें पहले कांग्रेस शासन में स्थानीय नेताओ और अब भाजपा के कुछ नेताओ के सामने नतमस्तक हुए पीएमओ डॉक्टर दिनेश वैष्णव अपने आप को इस मामले में बचा हुआ मान रहे हैं,

लेकिन अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आगामी दिनों में आचार संहिता खत्म होने के बाद इस मामले में बड़ी कार्रवाई देखने को मिलेगी l

शासन प्रशासन को रखा अंधेरे में

जब यह मामला स्थानीय विधायक आक्या की ओर से ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के रूप मे विधानसभा में उठाया था उसके अनुरूप अनियमितताओं की जांच करने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया था जिसमें पीएमओ की ओर से रिपोर्ट भेजी गई जो कि विभागीय स्तर पर की गई जांच से उल्टी पाई गई, पीएमओ द्वारा निदेशालय को मिथ्या एवं भ्रामक सूचनाओं भेजने की जानकारी मिली थी l

एमओयू पर पीएमओ डॉक्टर वैष्णव के हैं हस्ताक्षर

वही कार्मिक विभाग की ओर से मिले नोटिस के अनुसार डॉ लेक्षा पत्नी आशीष सरूपिया ने 13 मार्च 2018 से एआरटी सेंटर में सेवाएं दी, इसके बदले में उन्हें प्रति माह 52000 का भुगतान किया गया है,वही संयुक्त निदेशक चिकित्सा सेवाएं उदयपुर की ओर से गठित की गई टीम की जांच में सामने आया कि डॉक्टर लेक्षा सामान्य चिकित्सालय के भूमि तल पर संचालित संजीवनी अस्पताल में भी सेवाएं दे रही थी इसके लिए उन्हें प्रतिमाह इंडिया ब्रांच कोरों मंगला बेंगलुरु से सीधे ₹25000 का भुगतान मिल रहा था जबकि इस संबंध में हुए एमओयू पर खुद पीएमओ डॉक्टर दिनेश वैष्णव के हस्ताक्षर हैं ।

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