एक बगिया मां के नाम…:फलदार पौधे लगाएं, 3 लाख रुपए अनुदान पाएं

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(उजला दर्पण सीनियर रिपोर्टर रामगोपाल सिंह उईके)

अधिकतम एक एकड़ जमीन की मालिक महिलाएं लगा सकेंगी बगिया,15 अगस्त से योजना शुरू होगी

भोपाल फल उत्पादन बढ़ाने और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए राज्य सरकार 15 अगस्त से प्रदेश में ” एक बगिया मां के नाम” योजना शुरू कर रही है। इसमें स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं अपनी जमीन पर फलदार पौधों का बगीचा लगा सकेंगी। इस बगीचे को तैयार करने का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। इस योजना में शामिल होने के लिए महिला आवेदक के पास आधा एकड़ से एक एकड़ तक जमीन होना आवश्यक है।

जिन महिलाओं के परिवार में पिता, पति या ससुर के नाम पर जमीन है, वे उनकी सहमति पत्र के आधार पर इस योजना में बगीचा लगा सकेंगी। आधा एकड़ में 50 फलदार पौधे और एक एकड़ के बगीचे में 100 फलदार पौधे लगाए जाएंगे। पौधों के लिए गड्ढा खुदाई और पौधे खरीदने के लिए मनरेगा के माध्यम से राज्य सरकार पैसा देगी।

पौधों की सुरक्षा के लिए तार फेंसिंग, सिंचाई के लिए 50 हजार लीटर का जलकुंड और तीन साल तक देखरेख और जैविक खाद की राशि भी सरकार देगी। एक बगिया के निर्माण पर लगभग 3 लाख रुपए की ग्रांट तीन साल के भीतर दी जाएगी।

15 तक लिए जाएंगे आवेदन

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन को पात्र हितग्राहियों के चयन का जिम्मा सौंपा गया है। इसके लिए 15 जुलाई तक आवेदन लिए जाएंगे। महिला हितग्राहियों का चयन “एक पेड़ मां के नाम” एप के जरिए किया जाएगा।

प्रदेश में कुल 51 लाख महिलाएं वर्तमान में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं। सरकार ने पहले साल सिर्फ 30 हजार महिलाओं को ही इस योजना में शामिल करने का निर्णय लिया है। हर ब्लॉक से 100 महिला हितग्राही चयनित की जाएंगी।

सिपरी सॉफ्टवेयर से जमीन और पौधों का चयन

इस परियोजना में जमीन और पौधों का चयन सिपरी सॉफ्टवेयर के जरिए वैज्ञानिक ढंग से किया जाएगा। ताकि मिट्टी की प्रकृति और जलवायु के हिसाब से सही पौधों का चयन किया जा सके। पौधे कब और किस समय लगाए जाएंगे, पानी के स्रोत की मॉनिटरिंग भी सिपरी सॉफ्टवेयर के जरिए की जाएगी।

हर 25 एकड़ पर एक कृषि सखी नियुक्त की जाएगी, जो चयनित हितग्राहियों की मदद करेगी। ड्रोन और सैटेलाइट इमेज से इन बगीचों की निगरानी की जाएगी। पायलट फेज में मनरेगा परिषद ने धार जिले की बाग जनपद पंचायत के बाग, बाणदा, घोटियादेव, पिपरियापानी, झाबा, और चिकापोटी गांव में इसका परीक्षण कर लिया है।

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