एमपी में 1 सितंबर से पटवारियों की हड़ताल, ठप हो सकते हैं नामांतरण-बंटवारे के काम

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( रामगोपाल सिंह/ उजला दर्पण )

पटवारियों का कहना है कि वर्तमान में शुरू हुए वेब जीआईएस 2.0 में काम सही तरीके से नहीं हो पा रहा है। इससे नामांतरण, बंटवारा और डायवर्सन जैसे काम प्रभावित हो रहे हैं

भोपाल मध्यप्रदेश के पटवारी 1 सितंबर से हड़ताल पर जा सकते हैं। उनकी मुख्य शिकायत है कि नया जीआईएस 2.0 पोर्टल उपयोग में आसान नहीं है और बार-बार तकनीकी गड़बड़ियों से काम प्रभावित होता है। इस कारण नामांतरण, बंटवारा, डायवर्सन और नकल जैसी सेवाएं ठप हो रही हैं। किसान समय पर खसरा, बी-1 और अन्य दस्तावेज नहीं निकलवा पा रहे हैं। पटवारियों का कहना है कि जब तक पोर्टल की खामियां दूर नहीं की जाती, वे कामकाज का बहिष्कार करेंगे।

मध्यप्रदेश शासन की ओर से नया वेब जीएसएस 2.0 पोर्टल लांच किया गया है। जिसमें किसानों के साथ ही आन नागरिकों को आनलाइन भू-अभिलेख संबंधी सेवाएं मिलती है। इसी के जरिए डायवर्सन, नक्शा, विभाजन और केवाईसी, नामांतरण, नकल आदि संबंधी काम किए जाते हैं।

बताया जा रहा है कि राज्य सरकार जमीनों से जुड़े सभी काम ऑनलाइन करना चाहती है, लेकिन नया पोर्टल यूजर फ्रेंडली नहीं होने के कारण कर्मचारी परेशान हो रहे हैं। यह नया पोर्टल कई तकनीकी खामियों की वजह से पटवारियों को परेशान कर रहा है। इसे लेकर पटवारी नाराज हैं और लामबंद होना शुरू हो गए हैं। इस पोर्टल के विरोध में प्रदेश के पटवारी 1 सितंबर से हड़ताल के मूड में है। पटवारियों का कहना है कि वे एक सितंबर से इस पोर्टल पर काम करना बंद कर देंगे।

पटवारियों का कहना है कि वर्तमान में शुरू हुए वेब जीआईएस 2.0 में काम सही तरीके से नहीं हो पा रहा है। कुछ दिनों से पोर्टल पर काम नहीं होने के कारण नामांतरण, बंटवारा और डायवर्सन जैसे काम प्रभावित हो रहे हैं। भू-अभिलेख व्यवस्था लंबे समय से डिजिटलीकरण की प्रक्रिया से गुजर रही है। कई बार सर्वर डाउन होने से भी कार्य में बाधा उत्पन्न होती रहती है। किसानों को समय पर खसरा, बी-1 नामांतरण एवं नकल जैसी सेवाएं नहीं मिल पा रही है। समय पर काम नहीं होने के कारण मुख्यमंत्री हेल्प लाइन पर शिकायतों का अंबार लग जाता है। वहीं कलेक्टर की ओर से भी समय समय पर समीक्षा के दौरान पटवारी को दंडित करने के मामले सामने आते हैं।

पटवारियों की मांग

-GIS 2.0 पोर्टल की तकनीकी खामियां दूर की जाएं।

-स्थिर और उपयोगी प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया जाए।

-फील्ड स्टाफ पर कार्रवाई न होकर सिस्टम सुधार पर ध्यान दिया जाए।

क्या होगा असर

0-किसान समय पर जमीन संबंधी कार्यवाही नहीं कर पाएंगे।

0-ऋण, फसल बीमा, अनुदान के लिए जरूरी दस्तावेज अटक सकते हैं।

0-आम नागरिकों को नामांतरण, रजिस्ट्री जैसे कार्यों में दिक्कत हो सकती है।

0-सरकारी राजस्व कार्य ठप हो सकते हैं।

0-मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायतें और बढ़ सकती हैं।

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