जबलपुर, : शिव नगर के रहवासी आज नाराज़ नहीं, गुस्से में हैं। वजह साफ है – नगर निगम की लापरवाही। कॉलोनी में न झाड़ू लगती है, न नालियों की सफाई होती है। कचरा हफ्तों तक बोरियों में सड़ता रहता है और जब शिकायत करो तो जवाब मिलता है – “ये हमारा काम नहीं है!”
कचरा गाड़ी का कोई ठिकाना नहीं, सफाईकर्मी गायब!
डोर टू डोर कचरा लेने वाली गाड़ी का कोई समय तय नहीं। जब मन हो आता है, नहीं तो कॉलोनी कचरे से सड़ती रहती है। रहवासी पूछते हैं – “हम टैक्स क्यों भर रहे हैं? सेवा के नाम पर मिल क्या रहा है?” और जब गाड़ी वालों से कचरा उठाने को कहा जाता है तो जवाब मिलता है – “CSI जाने या पार्षद जाने, हम नहीं उठाएंगे!”
CSI की बहानेबाज़ी और जमीनी हकीकत में फर्क
CSI दावा करते हैं कि रोज गाड़ी भेजी जाती है, सफाईकर्मी तैनात हैं। अब सवाल है – क्या शिव नगर के लोग झूठ बोल रहे हैं? क्या गंदगी की तस्वीरें झूठ हैं? क्या नालियों से आती बदबू फर्जी है?
कॉलोनी का गार्डन बना कचरे का गोदाम, पौधे नहीं प्लास्टिक और कचरे के ढेर उग रहे
गार्डन में हरियाली गायब, बैठने की कोई व्यवस्था नहीं, पौधे सूख चुके और चारों ओर गंदगी का अंबार है। रहवासी मांग कर रहे हैं:
गार्डन की तुरंत सफाई हो
पौधारोपण किया जाए
बेंच और रोशनी की व्यवस्था हो
गार्डन को बच्चों और बुज़ुर्गों के लायक बनाया जाए
स्वच्छता सिर्फ भाषणों में, ज़मीन पर सड़ांध
नगर निगम हर मंच से ‘स्वच्छता अभियान’ का ढोल पीटता है, लेकिन हकीकत शिव नगर जैसी कॉलोनियों में दिखाई देती है – जहां कचरे के ढेर, बजबजाती नालियां और अधिकारी की बेरुखी आम बात हो गई है।
बरसात में बहेगा झूठा स्वच्छता मॉडल
रहवासी चेतावनी दे रहे हैं – “अब सब्र का बांध टूट चुका है। अगर नगर निगम हरकत में नहीं आया, तो हम आंदोलन की राह पकड़ेंगे।”
खबर में लोकेशन भी दी गई है।
जबलपुर प्रशासन को जवाब देना होगा – टैक्स लेने का हक तब है, जब सफाई देने की हिम्मत भी हो।
















