नई दिल्ली, भारत मंडपम में ‘युग युगीन भारत संग्रहालय’ को लेकर तीन दिवसीय स्टेट म्यूजियम कॉन्क्लेव का शुभारंभ हुआ। इस कॉन्क्लेव का उद्घाटन केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया। उन्होंने इस मौके पर कहा कि यह कॉन्क्लेव भारत में संग्रहालय इकोसिस्टम को और मजबूत करेगा।
शेखावत ने अपने संबोधन में कहा कि कॉन्क्लेव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दिए कांसेप्ट “विकास भी-विरासत भी” के अनुरूप निर्मित हो रहे ‘युग-युगीन भारत म्यूजियम’ से जुड़ा हुआ है। यह दुनिया का सबसे बड़ा म्यूजियम होगा, जो 1,54,000 वर्गमीटर भूमि पर आकार लेगा और सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा होगा। यह संग्रहालय नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक में बनाया जाएगा और इसे फ्रांस के सहयोग से एडैप्टिव रीयूज के माध्यम से विकसित किया जाएगा।

कॉन्क्लेव का उद्देश्य
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री जी ‘युग युगीन भारत संग्रहालय’ की कल्पना को साकार करने में राज्य संग्रहालयों और केंद्र सरकार के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। इसके जरिए भारत की कलाकृतियों की व्यापक समझ को बढ़ावा देने के लिए राज्यों को अपने-अपने राज्य के संग्रह के विषय में विस्तृत जानकारी प्रदान करने के लिए आमंत्रित किया गया है।
कौशल विकास और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
शेखावत ने कहा कि प्रसिद्ध भारतीय और अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय पेशेवरों के नेतृत्व में इन क्षमता निर्माण कार्यशालाओं के माध्यम से, मंत्रालय का उद्देश्य राज्य स्तर के कर्मियों को संग्रह प्रबंधन, अभिलेखीकरण और संग्रहालय प्रशासन में आवश्यक कौशल से लैस करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कॉन्क्लेव भारत में संग्रहालय इकोसिस्टम को और मजबूत करेगा और ‘युग युगीन भारत संग्रहालय’ परियोजना के लिए संभावित सहयोगियों के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण और अनुभव साझा करने के अवसर प्रदान करेगा।

प्रेजेंटेशन और अनुभव साझा करना
कॉन्क्लेव के पहले दिन अनेक राज्यों के आधिकारिक प्रतिनिधियों ने अपने प्रेजेंटेशन दिए। इसके साथ ही फ्रांस म्यूजियम के विसेंट सौलियर का भी प्रेजेंटेशन हुआ। इस कॉन्क्लेव के माध्यम से संग्रहालय प्रबंधन और विकास के क्षेत्र में विश्व की सर्वोत्म कार्यप्रणालियों का उदाहरण प्रस्तुत किया जाएगा।
इस तीन दिवसीय स्टेट म्यूजियम कॉन्क्लेव का उद्देश्य राज्य संग्रहालयों और केंद्र सरकार के बीच तालमेल बढ़ाकर, भारत में संग्रहालयों के इकोसिस्टम को और मजबूत करना है। इसके माध्यम से न केवल भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को संजोकर रखा जाएगा बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी भारत के संग्रहालयों की पहचान को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।










