जयपुर, 10 दिसंबर। प्रवासी राजस्थानी दिवस के अवसर पर राजस्थान सरकार ने राज्य की महत्वाकांक्षी राजस्थान पर्यटन नीति–2025 को औपचारिक रूप से लॉन्च किया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सीतापुरा स्थित जेईसीसी में आयोजित पर्यटन सत्र के दौरान इस नीति का विमोचन किया। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, विभागीय अधिकारी, प्रवासी राजस्थानी समुदाय और पर्यटन उद्योग के अनेक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नई नीति राजस्थान के पर्यटन विकास का दूरदर्शी दस्तावेज है, जो राज्य को न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अग्रणी स्थान दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि नीति निवेश, नवाचार, रोजगार और सामुदायिक सहभागिता को नई ऊर्जा देगी तथा विकसित राजस्थान 2047 के लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक समर्पित पॉलिसी इम्प्लीमेंटेशन यूनिट बनाई जाएगी ताकि सभी प्रावधानों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
सरकार पर्यटन परियोजनाओं को गति देने के लिए पीपीपी मॉडल और इज ऑफ डूइंग बिजनेस को आधार बना रही है। सभी अनुमतियों को एकीकृत सिंगल वेब पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। पर्यटन व्यवसायों की ग्रेडिंग, गतिविधियों की मॉनिटरिंग और डेटा प्रबंधन के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा। राज्य सरकार हर वर्ष राजस्थान पर्यटन पुरस्कार भी देगी। युवाओं व विद्यार्थियों के लिए पर्यटन संबंधित कोर्स, कौशल प्रशिक्षण, स्कॉलरशिप और ट्रेनिंग–इंसेंटिव उपलब्ध कराए जाएंगे।
उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि पर्यटन नीति–2025 राज्य को सुरक्षित, सक्षम और विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य बनाने का संकल्प है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की संस्कृति, विरासत, कला और प्राकृतिक विविधता को आधुनिक जरूरतों के साथ जोड़कर नया अनुभव देना सरकार की प्राथमिकता है। यह नीति धार्मिक–सांस्कृतिक, एडवेंचर, वेलनेस, एस्ट्रो–टूरिज्म और डिजिटल टूरिज्म जैसे क्षेत्रों में राज्य को नई पहचान देगी।
उन्होंने कहा कि सरकार पर्यटन के सभी आयामों—मार्केटिंग, प्रमोशन, मेले–त्योहार, निवेश, डिजिटल समाधान, कौशल विकास और युवाओं को रोजगार—पर स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर काम करेगी। यह नीति केवल दस्तावेज नहीं बल्कि राजस्थान को वैश्विक पर्यटन शक्ति बनाने का रोडमैप है।
विशेष पर्यटन क्षेत्र और धार्मिक सर्किट
नई नीति के तहत चुनिंदा जिलों में स्पेशल टूरिज्म जोन (STZ) प्लग–एंड–प्ले मॉडल पर स्थापित किए जाएंगे, जहाँ आधारभूत ढांचा सरकार और आतिथ्य सेवाएँ निजी क्षेत्र मिलकर विकसित करेंगे।
कृष्ण गमन पथ और बृज–द्वारका तीर्थ मार्ग के अंतर्गत प्रमुख मंदिरों में यात्री सुविधाओं का विस्तार होगा। वन एवं देवस्थान विभाग के सहयोग से धार्मिक व वन्यजीव–आधारित टूरिज्म हब भी विकसित किए जाएंगे, जिससे पर्यटन के नए अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।










