(उजला दर्पण सीनियर रिपोर्टर रामगोपाल सिंह उईके)
जबलपुर लगभग 60 करोड़ रुपए से ज्यादा के धान परिवहन घोटाले के मामले में क्राइम ब्रांच ने मास्टरमाइंड प्रभारी जिला प्रबंधक एमपीएससीएससी दिलीप किरार को छतरपुर से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पर 74 हजार रुपए का इनाम घोषित था। पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया है। घोटाले में अब तक 19 अधिकारी-कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
घोटाला सामने आने के बाद जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना के निर्देश पर जिले के विभिन्न थानों में 72 से अधिक आरोपियों पर एफआईआर दर्ज की गई थी। क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि दिलीप किरार छतरपुर में अपने एक रिश्तेदार के घर छिपा है, जहां से उसे गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी से पहले पुलिस ने जबलपुर के सराफा स्थित उसके निवास पर भी छापा मारा था, लेकिन वह वहां नहीं मिला।
614 फर्जी ट्रिप, एक ही वाहन से कई फेरे
जांच में सामने आया कि धान परिवहन के नाम पर 614 फर्जी ट्रिप लगाए गए। इनमें 55 कार, पिकअप, ट्रैक्टर और कम लोडिंग क्षमता वाले वाहनों के नंबर फर्जी तौर पर रजिस्ट्रेशन में दर्ज किए गए थे। इन वाहनों से एक-दो दिन के अंतराल में कई बार धान परिवहन दिखाया गया, जो तकनीकी रूप से संभव ही नहीं था।
30 करोड़ से शुरू होकर 60 करोड़ तक पहुंचा घोटाला
शुरुआती जांच में 30 करोड़ 14 लाख 19 हजार 600 रुपए मूल्य की 1 लाख 31 हजार 52 क्विंटल धान की हेराफेरी सामने आई थी। बाद में यह आंकड़ा बढ़कर करीब 60 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। कलेक्टर के निर्देश पर अपर कलेक्टर नाथूराम गोंड की अध्यक्षता में गठित जांच समिति ने विस्तृत रिपोर्ट तैयार की, जिसमें यह घोटाला उजागर हुआ।
जांच में यह भी सामने आया कि अंतर जिला मिलिंग के लिए जबलपुर में रखी धान को जिले के बाहर भेजने की बजाय, उसे स्थानीय दलालों को बेच दिया गया। इस फर्जीवाड़े में मिलर्स, एमपी सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन के अधिकारी-कर्मचारी और उपार्जन केंद्र के लोग भी शामिल थे।
शासकीय दस्तावेजों में की गई थी हेरफेर
घोटाले में शामिल लोगों ने शासकीय दस्तावेजों में कूट रचना कर ट्रक नंबर, चालान, और परिवहन फर्जी तरीके से दर्ज किए। जांच में यह भी पाया गया कि पाटन थाना क्षेत्र में ही 2 दिसंबर 2024 से 23 जनवरी 2025 के बीच 21,129 क्विंटल धान, जिसकी कीमत करीब 4.86 करोड़ रुपए है, की धोखाधड़ी की गई।
19 आरोपी गिरफ्तार, दिलीप किरार रिमांड पर
घोटाले में अब तक कुल 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें एमपीएससीएससी के अधिकारी, ऑपरेटर, मिलर्स और सहकारी संस्थाओं के कर्मचारी शामिल हैं। इनमें प्रमुख नाम हैं:
दिलीप किरार – प्रभारी जिला प्रबंधक
सुनील प्रजापति – ऑपरेटर
बी.एस. मेहर – प्रभारी इश्यु सेंटर
मनदीप सिंह, प्रतीक सक्सेना, संजय जैन – राइस मिलर्स
गंधर्व सिंह, रामस्वरूप रजक – समिति प्रबंधक
शैलेन्द्र ठाकुर, सौरभ ठाकुर – कंप्यूटर ऑपरेटर्स (पूरी सूची में कुल 19 नाम शामिल हैं।) इन सभी पर BNS की धारा 116/25, 61(2), 338, 336(3), 340(2), 318(4), 316(2), 316(4) और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
कई थानों में दर्ज हैं प्रकरण
मुख्य आरोपी को पुलिस ने लिया रिमांड पर
मुख्य आरोपी दिलीप किरार के खिलाफ पाटन, कुण्डम, सिहोरा, मझगवां, मझोली, कटंगी, गोसलपुर, भेड़ाघाट, पनागर, बेलखेड़ा, बरेला और गोराबाजार थानों में भी धोखाधड़ी और गबन के केस दर्ज हैं।
फिलहाल आरोपी पुलिस रिमांड पर है, और उससे पूछताछ जारी है। मामले में और गिरफ्तारियां भी संभावित हैं।












