जन-सुविधा पर भारी पड़ता सत्ता का आत्मप्रचार
सड़क किनारे लगे साइन बोर्ड किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में केवल धातु की पट्टिकाएँ नहीं होते, बल्कि वे शासन की संवेदनशीलता और प्रशासनिक जिम्मेदारी का आईना होते हैं। इन्हीं संकेतकों के सहारे आम नागरिक, बाहरी यात्री और आपात सेवाएँ तय करती हैं कि किस दिशा में जाना है और मंज़िल कितनी दूर है। लेकिन मौजूदा समय में यह व्यवस्था लगातार कमजोर पड़ती जा रही है। कारण यह नहीं कि साइन बोर्ड मौजूद नहीं हैं, बल्कि इसलिए कि वे नेताओं के बधाई संदेशों, जन्मदिन पोस्टरों और सत्ता के उत्सवों से पूरी तरह ढक दिए गए हैं।
बधाई के नाम पर सत्ता प्रदर्शन
आज सड़कों पर लगे अधिकांश बैनर सीधे चुनावी प्रचार के नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री, मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को “बधाई” देने के नाम पर लगाए जाते हैं। स्थानीय स्तर के नेता सत्ता के शीर्ष चेहरों के साथ अपने नाम चमकाने के लिए सार्वजनिक संपत्ति का खुला इस्तेमाल करते हैं। चौराहों, मोड़ों और फ्लाईओवर के पास लगे दिशा-सूचक बोर्ड अब रास्ता नहीं, बल्कि यह बताते हैं कि किस नेता का जन्मदिन है और किसने बधाई दी है। यह एक ऐसा छिपा हुआ प्रचार है, जो कानून की सीमाओं में रहते हुए भी उसकी भावना का खुला उल्लंघन करता है।

जब साइन बोर्ड गायब हों, तो GPS भी भटका देता है
साइन बोर्ड ढके होने का असर सिर्फ असुविधा तक सीमित नहीं रहता, यह सीधे सुरक्षा से जुड़ा मामला बन जाता है। रास्ता न दिखने पर लोग मजबूरी में GPS और गूगल मैप का सहारा लेते हैं, लेकिन तकनीक हर बार सही निर्णय नहीं लेती। हाल ही में जयपुर में GPS के भरोसे चलते हुए एक कार का बिरला मंदिर की सीढ़ियों पर चढ़ जाना इसी लापरवाही का जीवंत उदाहरण है। यह घटना केवल वायरल कंटेंट नहीं, बल्कि उस सिस्टम की विफलता है, जिसने सड़कों पर स्पष्ट दिशा-निर्देश सुनिश्चित नहीं किए।
प्रशासन की चुप्पी, सत्ता की सुविधा
सार्वजनिक संपत्ति पर पोस्टर-बैनर लगाना नियमों के खिलाफ है, लेकिन जब यह काम सत्ता से जुड़े लोग करते हैं, तो नियम अक्सर मौन हो जाते हैं। प्रशासन की यह चुप्पी या तो दबाव को दर्शाती है या फिर मिलीभगत को। दोनों ही स्थितियों में नुकसान जनता का होता है। शासन और सत्तारूढ़ दल के बीच की रेखा जब मिटती है, तो सबसे पहले नागरिक सुविधाएँ ही बलि चढ़ती हैं।
दिशा साइन बोर्ड की, सजावट राजनीति की नहीं
यह संपादकीय किसी एक दल या व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि उस सोच के खिलाफ है जो जनता की सुविधा को व्यक्तिगत और राजनीतिक महिमामंडन से कमतर आंकती है। साइन बोर्ड नेताओं को बधाई देने के लिए नहीं, बल्कि नागरिकों को सुरक्षित और सही दिशा दिखाने के लिए होते हैं। यदि समय रहते इस प्रवृत्ति पर रोक नहीं लगी, तो इसके दुष्परिणाम केवल अव्यवस्था तक सीमित नहीं रहेंगे।
— Chief Editor: BL MAAN










