मिर्च का कहर! 9 महीने के बच्चे की जान जोखिम में, ऑपरेशन से बचा ली जान* 

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*मिर्च का कहर! 9 महीने के बच्चे की जान जोखिम में, ऑपरेशन से बचा ली जान*

(डॉक्टर कविता सचदेवा की सलाह-बच्चे को अकेला ना छोड़ें)

 

*जबलपुर* 9 माह का बच्चा खेल-खेल में हरी मिर्च निगल गया। आहार नली में मिर्च फंसने के बाद बच्चे ने रोना शुरू कर दिया और जब वह किसी तरह चुप नहीं हुआ, तो परिजन उसे बरेला स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां प्राथमिक इलाज के बाद भी बच्चे ने रोना बंद नहीं किया, तो उसे नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। जहां ऑपरेशन कर बच्चे की आहार नली से मिर्च निकाली गई।

घटना बरेला के पास स्थित गांव की है। दोपहर बच्चा घर के बाहर खेल रहा था तभी उसके हाथ हरी मिर्च लग गई। बच्चे ने मिर्च को मुंह में डाला और निगल गया। जब वह आहार नली में पहुंची तो जलन हुई होगी, जिससे बच्चा रोने लगा। मां ने चुप कराने का काफी प्रयास किया, जब बच्चे के चुप करने के सारे जतन फेल हो गए, तो परिजन अस्पताल ले गए। इससे पहले भी दो ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें एक बच्चे के सीने से कीड़ा तो दूसरे की आहार नली से चिकन का टुकड़ा निकाला जा चुका है। रात मेडिकल कॉलेज पहुंचे बच्चे को ईएनटी विभाग में ईएनटी एचओडी डॉ. कविता सचदेवा ने देखा। बच्चा लगातार रो रहा था और उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। बच्चे के पिता पवन कुमार ने बताया कि दोपहर को घर के आंगन में खेलते समय उसने कुछ खा लिया, तभी से रो रहा है। फिर बच्चा उल्टी करने लगा। बच्चा सांस भी नहीं ले पा रहा था। गांव के साथ बरेला में भी डाॅक्टर को दिखाया, पर आराम नहीं मिला।

पवन ने बताया कि बरेला के स्वास्थ्य केंद्र में बताया गया कि बच्चे को निमोनिया हो गया, इसके बाद परिजन बच्चे को घर ले गए, पर लगातार रोने के कारण उसे मेडिकल काॅलेज लेकर आए। जब बच्चे का एक्स-रे किया गया तो आहार नली में मिर्च फंसी हुई नजर आई। ईएनटी विभाग प्रमुख डाॅ. कविता सचदेवा- डॉ. ब्यौहार और अन्य टीम के सदस्यों ने बच्चे का तुरंत आपरेशन करते हुए ब्रोंकोस्कोपी की मदद से हरी मिर्च को बाहर निकाला। डाक्टरों के मुताबिक बच्चा अभी पूरी तरह से स्वस्थ है।

ईएनटी विभाग अध्यक्ष डाॅ. कविता सचदेवा ने बच्चों के परिजनों से अपील की है, कि वे 2 साल से कम उम्र के बच्चों पर हमेशा नजर रखें। बच्चों को अकेला बिल्कुल ना छोड़ें। बच्चे के खेलने के स्थान को साफ रखें। उन्होंने बताया कि मासूम को पता नहीं होता कि उसके हाथ में आने वाली चीज क्या है और वह उसकी जान के लिए कितनी खतरनाक साबित हो सकती है।

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