( अंकित सेन /उजला दर्पण )
रीवा मध्य प्रदेश के रीवा जिला प्रशासन में एक और बड़ा घोटाला सामने आया है। कलेक्ट्रेट में सहायक ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत अभिराम मिश्रा ने अपनी अनुकंपा नियुक्ति बचाने के लिए कूट रचित दस्तावेज प्रस्तुत किए। चौंकाने वाली बात यह है कि मिश्रा ने स्वयं स्थापना शाखा में रहते हुए फर्जी CPCT (कंप्यूटर दक्षता प्रमाण पत्र) मार्कशीट तैयार की और परिवीक्षा अवधि पूरी करने के लिए जमा की।
जब मार्कशीट पर संदेह हुआ, तो कलेक्टर प्रतिभा पाल ने MPSEDC को पत्र लिखकर सत्यापन मांगा। जवाब में डाक और ईमेल के जरिए जानकारी मिली कि अभिराम मिश्रा की मार्कशीट फर्जी है और वे CPCT में फेल हैं। लेकिन इस गंभीर जानकारी को दबा दिया गया। सवाल उठता है कि इतनी महत्वपूर्ण जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंची? क्या भोपाल से मिली जानकारी को जानबूझकर छिपाया गया? यह फर्जीवाड़ा किसके इशारे पर हुआ ?
कलेक्टर प्रतिभा पाल पर अब सबकी निगाहें हैं। लोग जानना चाहते हैं कि क्या इस मामले में सख्त कार्रवाई होगी? यह घटना रीवा प्रशासन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है। रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल ने पूरे मामले में कार्रवाई करने












