(उजला दर्पण सीनियर रिपोर्टर रामगोपाल सिंह उईके)
आदिवासियों पर हो रहे वन और राजस्व विभाग के अत्याचारों के विरुद्ध एक ऐतिहासिक प्रतिरोध बनकर उभरी। मनावर विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने मंच से साफ कहा कि महिलाओं के साथ अभद्रता, जबरन बेदखली और जंगल-जमीन से आदिवासियों को हटाने की घटनाएं बर्दाश्त नहीं की जाएंगी, और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी महापंचायत में बड़ी संख्या में आदिवासी पुरुष व महिलाएं, संगठन पदाधिकारी, और विभिन्न जिलों से आए कार्यकर्ता जुटे। वक्ताओं ने बताया कि कैसे वन विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारी धमकाते हैं, कागज़ दिखाने के नाम पर बेइज्जती करते हैं और महिलाओं तक को नहीं बख्शते।डॉ हीरालाल अलावा जी जयस संरक्षक व मनावर विधायक, लक्षमन सिंह परते जयस जिला अध्यक्ष, अखिलेश इरपाचे जयस जिला प्रभारी, रोहित धुर्वे कमोद धुर्वे आदि जयस नेताओं के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं – पुष्पराज पटेल, संजय अहिरवार, अजय अहिरवार और द्वारका चौधरी – ने भी संघर्ष में साथ खड़े रहने का भरोसा दिया।
महापंचायत के अंत में राज्यपाल के नाम 8 सूत्रीय
ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें डगपुरा व खकरापुरा में आदिवासियों के साथ हुए अत्याचार की न्यायिक जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई।यह महापंचायत न केवल सत्ता के खिलाफ आदिवासियों की चेतावनी थी, बल्कि यह भी साबित कर गई कि यदि प्रशासन चुप रहेगा, तो जनता की आवाज़ और बुलंद होगी।”जिनके जंगल छीने जा रहे हैं, अब वो खुद जंगल की आग बन रहे हैं!”











