माधवगढ़ किले की लूट — 25 लाख में इतिहास का सौदा! ⚠️
ये सौदा नहीं, साज़िश है। ये लीज़ नहीं, लूट है।
सतना, मध्यप्रदेश:
जब अफसरों की कलम बिक जाती है और विरासत की रक्षा करने वाले लुटेरे बन जाते हैं, तब होता है माधवगढ़ जैसा कांड।
7 एकड़ बेशकीमती ज़मीन + ऐतिहासिक किला = 25 लाख में 99 साल की लीज़!
सालाना किराया? सिर्फ 25,000!
इतने में आज महानगर में एक कमरा नहीं मिलता, और यहां पूरा किला सौंप दिया गया।
वादे थे – हेरिटेज होटल बनेगा।
हकीकत – एक ईंट तक नहीं जोड़ी गई।
न कोई मरम्मत, न कोई काम।
बस खामोशी और गिरता हुआ किला।
ये गलती नहीं, मिलीभगत है।
इतिहास को धीरे-धीरे तोड़ो, फिर बेच दो – यही प्लान है।
अब अगला नंबर चित्रकूट का है। वहां भी ज़मीन की नब्ज़ टटोली जा रही है।
क्या वहां भी यही खेल दोहराया जाएगा?
इससे बड़ा सवाल ये है —
क्या जनता लाचार रहेगी?
क्या पत्रकार चुप रहेंगे?
क्या किले यूं ही मिट्टी में मिलते रहेंगे?
अब खामोशी गुनाह है।
अब सवाल करना ज़रूरी है।
अब आवाज़ उठानी होगी – वरना अगली धरोहर आपकी होगी।
ये सिर्फ एक खबर नहीं, ये बिगुल है –
जागो, बोलो, और इस लूट के खिलाफ खड़े हो जाओ!










