Loksabha : स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज, अमित शाह का विपक्ष पर तीखा हमला

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नई दिल्ली: लोकसभा में बुधवार को स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज कर दिया गया। इस प्रस्ताव पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए गृह मंत्री Amit Shah ने करीब 56 मिनट तक विस्तार से अपना पक्ष रखा और विपक्ष, खासकर कांग्रेस तथा Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला।

अमित शाह ने कहा कि विपक्ष लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि उसे सदन में बोलने का मौका नहीं दिया जाता, जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल उलट है। शाह के अनुसार 18वीं लोकसभा में कांग्रेस सांसदों को भाजपा से भी अधिक समय मिला है। उन्होंने कहा कि जब बोलने का अवसर मिलता है तो विपक्ष के नेता अक्सर विदेश दौरों पर रहते हैं और बाद में शिकायत करते हैं कि उन्हें बोलने नहीं दिया गया।

नियमों से चलेगा सदन, मेला नहीं: अमित शाह

गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में कहा कि संसद एक व्यवस्थित संस्था है और यहां कामकाज नियमों के अनुसार ही होगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि स्पीकर को यह अधिकार है कि वह नियमों के उल्लंघन की स्थिति में किसी सदस्य को रोकें या माइक बंद कर दें।

शाह ने तंज कसते हुए कहा कि संसद कोई मेला नहीं है जहां हर कोई अपनी मर्जी से बोलता रहे। उन्होंने कहा कि विपक्ष जब बोलना चाहता है तो अक्सर नियमों का पालन नहीं करता और जब नियमों के अनुसार बोलने का मौका दिया जाता है तो वह उसका उपयोग नहीं करता।

राहुल गांधी के आचरण पर भी उठाए सवाल

अमित शाह ने अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी के संसद में व्यवहार को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी कभी प्रधानमंत्री के पास जाकर गले लग जाते हैं, कभी आंख मारते हैं और कभी फ्लाइंग किस करते हैं। शाह ने कहा कि ऐसे व्यवहार के बाद वही लोग स्पीकर के आचरण पर सवाल उठा रहे हैं, जो खुद संसदीय मर्यादा का पालन नहीं करते।

इस टिप्पणी के बाद विपक्षी सांसदों ने जोरदार हंगामा किया और सदन में “अमित शाह माफी मांगो” के नारे लगाए। कुछ देर के लिए सदन का माहौल काफी गरम हो गया।

कांग्रेस को भाजपा से ज्यादा मिला बोलने का समय

अमित शाह ने अपने जवाब में आंकड़े भी पेश किए। उन्होंने बताया कि 17वीं लोकसभा में कांग्रेस के पास 52 सांसद थे, लेकिन फिर भी उन्हें कुल 157 घंटे 55 मिनट का समय मिला। शाह के मुताबिक यह समय भाजपा की तुलना में कई गुना अधिक था, जबकि भाजपा के सांसदों की संख्या कांग्रेस से छह गुना ज्यादा थी।

उन्होंने कहा कि 18वीं लोकसभा में भी कांग्रेस को भाजपा से लगभग दोगुना समय मिला, इसके बावजूद विपक्ष के नेता यह आरोप लगाते रहते हैं कि उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जाता। शाह ने सवाल उठाया कि जब 157 घंटे से अधिक समय कांग्रेस सांसदों को मिला तो उस दौरान विपक्ष के नेता खुद क्यों नहीं बोले।

कई महत्वपूर्ण चर्चाओं से राहुल गांधी रहे अनुपस्थित

गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी सदन में मौजूद नहीं रहे। उन्होंने कहा कि वक्फ संशोधन, धारा 370 और एसआईआर जैसे मुद्दों पर चर्चा के समय राहुल गांधी सदन में नहीं थे।

शाह ने यह भी कहा कि कई बार विपक्ष की ओर से खुद चर्चा का अवसर होने के बावजूद सदन को बाधित किया गया। उन्होंने कहा कि अचानक यह मांग उठाई जाती है कि किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर संसद में बहस हो, जबकि भारत के राजनीतिक इतिहास में किसी नेता की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर संसद में चर्चा नहीं हुई है।

ट्रेड डील और AI समिट पर भी दिया जवाब

अमित शाह ने विपक्ष द्वारा उठाए गए अन्य मुद्दों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ हुई किसी भी व्यापारिक समझौते में भारतीय किसानों का नुकसान नहीं हुआ है। शाह ने आरोप लगाया कि किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान वर्ष 2013 में कांग्रेस सरकार के दौरान हुआ था।

इसके अलावा दिल्ली में आयोजित AI समिट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में 80 देशों की बड़ी कंपनियां और 20 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हुए थे, लेकिन कांग्रेस के कुछ लोगों ने वहां प्रदर्शन किया। शाह ने कहा कि सरकार का विरोध करते-करते कांग्रेस अब देश की छवि को भी नुकसान पहुंचाने लगी है।

अक्साई चिन विवाद पर भी कांग्रेस को घेरा

चीन के साथ सीमा विवाद के मुद्दे पर अमित शाह ने कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि अक्साई चिन का लगभग 38 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र कांग्रेस सरकार के समय चीन के कब्जे में गया था। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru के उस बयान का भी जिक्र किया जिसमें कहा गया था कि वहां घास का एक तिनका भी नहीं उगता।

अविश्वास प्रस्ताव लंबित रहने तक कार्यवाही से दूर रहे थे बिरला

स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के करीब 119 सांसदों ने आरोप लगाया था कि सदन की कार्यवाही चलाते समय वे पक्षपात कर रहे हैं और विपक्ष को पर्याप्त समय नहीं दे रहे हैं।

हालांकि संसदीय परंपरा का हवाला देते हुए ओम बिरला ने अविश्वास प्रस्ताव लंबित रहने के दौरान लोकसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं की। इस दौरान सदन का संचालन पैनल ऑफ चेयरपर्सन के सदस्य करते रहे।

अब जब अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हो गया है, तो उम्मीद है कि स्पीकर ओम बिरला फिर से नियमित रूप से लोकसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता करेंगे।

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