देश में कोरोना का आगमन हो चुका है। इक्का – दुक्का मामलों से शुरू होकर संख्या एक हजार के करीब पहुँच रही है। कुछ मौतें भी हो चुकी हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार भी इसका संक्रमण दक्षिण एशिया के देशों से ही आया है लेकिन ये नया वैरिएंट उतना खतरनाक नहीं है जितना 2020 और 2021 के दौरान देखने मिला था। हालांकि उसके बाद वाले वर्षों में भी दुनिया के अनेक देशों में कोरोना के शिकार लोग मिलते रहे किंतु महामारी के उस भयावह दौर की तुलना में वह समुद्र में एक बूंद जैसा था। चिकित्सा विज्ञान भी मानता है कि कोरोना वायरस न समाप्त हुआ और न होगा लेकिन वह कमजोर होता जाएगा और इसलिये 2021 के बाद उसका प्रकोप और विस्तार पूर्वापेक्षा कम हो गया। अभी कोरोना का जो संक्रमण आया उससे पीड़ित मरीज कुछ ही दिनों में स्वस्थ हो रहे हैं और तकलीफ भी काफी साधारण है। सर्दी, खाँसी और बुखार जैसे सामान्य लक्षण ही कोरोना के संकेत हैं। हालांकि जिन लोगों को पहले टीके ( वैक्सीन) लग चुके थे उनको कोरोना होने पर भी वे जल्द स्वस्थ हो गए। लेकिन टीका लगवाने वाले व्यक्ति को ये खुशफहमी दिल से निकाल फेंकना चाहिए कि उसके पास ऐसा रक्षा कवच है जिसके कारण वह कोरोना से पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। अब तक जितने भी लोग कोरोना से संक्रमित हुए उनमें से ज्यादातर लोग टीका लगवा चुके थे। फ़ायदा ये हुआ कि उन पर इलाज का असर उन लोगों की तुलना में अधिक हुआ जिन्होंने टीका नहीं लगवाया था। ऐसे में भले ही बीमारी का आक्रमण पहले जैसा शक्तिशाली न हो किंतु सावधानी हटी ,दुर्घटना घटी वाला सूत्र इस मामले में भी पूर्णरूपेण लागू होता है। इसलिए इसके पहले कि कोरोना दोबारा महामारी का रूप ले, लोगों में। बचाव के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना आवश्यक है। बीमार होने के बाद इलाज करवाना तो मजबूरी होती है किंतु यदि पहले से ही सावधानी रखें तो बचाव भी सम्भव है, विशेष रूप से जब बीमारी संक्रामक और विश्वव्यापी हो तब तो सतर्कता और भी जरूरी है। हालांकि एक बात अच्छी है कि कोरोना के लक्षण और उसके उपचार के प्रति ज्यादातर लोग अवगत हैं। पिछली दोनों लहरों के बाद बीमारी के बारे में चिकित्सा विज्ञान में काफी शोध हो चुके हैं जिसकी वजह से कारगर दवाइयों का भी उत्पादन होने लगा है। टीके भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। बावजूद इसके कभी – कभी वायरस की चालाकी के सामने इंसान असहाय होकर रह जाता है क्योंकि वह तेजी से रूप बदलने में माहिर होता है। इसलिए जरूरी है कि भले ही कोरोना के नये वेरिएंट को पहले जितना खतरनाक न माना जा रहा हो लेकिन उसे हल्के में लेना जानलेवा हो सकता है। इस बारे में ध्यान रखना होगा कि कोरोना की पहली लहर का सफलतापूर्वक सामना करने के कारण देश में जो बेफिक्री आई उसका दुष्परिणाम दूसरी लहर में कई गुना ज्यादा मौतों के रूप में सामने आया। ये देखते हुए पिछली गलतियों से सबक लेकर हरसंभव सावधानी बरतने की जरूरत है। लोगों में भय फैलाने की बजाय उनमें कोरोना से बचाव हेतु सामान्य सावधानियों का पालन करने के प्रति दायित्व बोध जागृत करने की आवश्यकता है। ये इसलिए भी जरूरी है क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय विदेश यात्रा पर जाते हैं। इसी तरह अन्य देशों के काफी नागरिक भारत आते हैं। इसलिए संक्रमण का खतरा बना रहेगा । सरकार के अलावा विभिन्न राजनीतिक दलों और समाजसेवी संगठनों को चाहिए वे लोगों को कोरोना से बचने के लिए सावधानी के लिए प्रेरित करने आगे आएं। जनता को भी ये जान लेना चाहिए कि एक व्यक्ति के संक्रमित होने से उसका पूरा परिवार ही नहीं अपितु संपर्क में आने वाले हर किसी को कोरोना अपनी चपेट में ले सकता है। लिहाजा भीड़ भरी जगहों पर मास्क का उपयोग एक आदत बना लेना चाहिए। इसके अलावा हाथ मिलाने जैसे अभिवादन के तौर – तरीकों के स्थान पर भारतीय संस्कृति में प्रचलित नमस्कार की आदत डाली जाए। अकारण भीड़ वाले क्षेत्रों में जाने से परहेज करना भी जरूरी है। खान – पान की शुद्धता भी संक्रमण से बचाने में सहायक होती है। कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि पिछली बार कोरोना चिकित्सकों और आम जनता दोनों के लिए अपरिचित था किंतु इस बार उसकी पदचाप स्पष्ट महसूस की जा सकती है । इसलिए सरकार की चेतावनी का इंतजार किये बिना ही सतर्क होना जरूरी है।











