जबलपुर के हर वार्ड में मच्छरों ने आतंक मचा रखा है। गली-गली, घर-घर, सड़क-सड़क – मच्छरों के झुंड इस कदर हमला बोल रहे हैं, जैसे शहर पर उन्हीं का कब्जा हो गया हो। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि लोग दिन-रात मच्छरों से परेशान हैं, लेकिन नगर निगम आंख मूंदे बैठा है।
कई इलाकों में तो ये भी कहा जा रहा है कि निगम के अफसरों और कर्मचारियों की दोस्ती मच्छरों से हो गई है, तभी तो न फॉगिंग मशीन दिखती है, न दवा का छिड़काव। वार्डवासी पूछ रहे हैं कि आखिर ये मशीनें हैं कहां? क्या सिर्फ फोटो खिंचवाने और कागजों पर रिपोर्ट बनाने के लिए रखी गई हैं?
बात सिर्फ गंदगी की नहीं, अब ये सीधा स्वास्थ्य का मामला बन चुका है। मलेरिया, डेंगू, वायरल फीवर – बीमारियों की चपेट में लोग आने लगे हैं। हर मोहल्ले से यही आवाज आ रही है – “अब तो हद हो गई!”
निगम के अधिकारी शायद किसी गहरी नींद में हैं, या जानबूझकर अनदेखी कर रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या निगम तब जागेगा जब हर घर से बीमार लोग अस्पताल पहुंचने लगेंगे?
जबलपुर के नागरिक अब जवाब चाहते हैं। सिर्फ दावे नहीं, ज़मीनी कार्रवाई चाहिए। वरना जनता यही कहेगी — “मच्छर काम पर हैं, नगर निगम आराम पर!”












