जबलपुर। सड़क सुरक्षा को लेकर कलेक्टर ने बड़ा आदेश निकाला था कि बिना हेलमेट पेट्रोल नहीं मिलेगा। लेकिन यह आदेश अब सिर्फ़ दिखावा बनकर रह गया है। दो दिन की सख़्ती के बाद शहर के पेट्रोल पंपों ने नया “जुगाड़” निकाल लिया है।
हकीकत यह है कि पेट्रोल पंप कर्मचारी खुलेआम आदेश की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। बिना हेलमेट पहुंचे लोगों से कहा जाता है – “हेलमेट लगाइए, तभी पेट्रोल मिलेगा।” और फिर शुरू होता है अदला-बदली का चालाकी भरा खेल। कोई अपने दोस्त से हेलमेट लेता है, कोई पीछे खड़े शख़्स से। यहां तक कि कई पंप मालिकों ने खुद ही एक “कॉमन हेलमेट” रख छोड़ा है, जिसे हर ग्राहक को पहनाकर पेट्रोल दिया जा रहा है।
ज़रा सोचिए — वही एक हेलमेट दिनभर सैकड़ों सिरों पर चढ़ता-उतरता है। न सुरक्षा बची, न नियम की गरिमा। यह सीधा-सीधा जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना के आदेश की खिल्ली उड़ाना है।
कछपुरा ब्रिज के पास स्थित मेहता पेट्रोल पंप पर यह खेल सबसे ज़्यादा देखा जा रहा है। दमोह नाका और रानीताल चार्ट नंबर गेट के पास वाले पंपों पर भी यही चालाकी धड़ल्ले से चल रही है। शहर के बाकी पंप भी इससे पीछे नहीं हैं।
सवाल यह है कि जब आदेश को लागू करने की हिम्मत ही नहीं है, तो फिर ऐसे फरमान क्यों निकाले जाते हैं? क्या प्रशासन सिर्फ़ अख़बारों और बैठकों में सख़्ती दिखाने के लिए आदेश जारी करता है?
जनता यही चाहती है कि कलेक्टर महोदय अपने भरोसेमंद अधिकारियों या गुप्तचरों को भेजकर सच्चाई देखें और ऐसे पेट्रोल पंपों पर कठोरतम कार्रवाई करें। वरना यह “हेलमेट अदला-बदली” का चालाकी भरा खेल चलता ही रहेगा और आदेश की गंभीरता हमेशा की तरह फाइलों में दबी रह जाएगी।













