उदयपुर। प्रताप गौरव केन्द्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ में सोमवार को ‘राष्ट्रीय साहित्य दीर्घा’ की औपचारिक शुरुआत हुई। उद्घाटन समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने साहित्य को समाज-निर्माण की मूलधारा बताते हुए कहा कि साहित्य केवल ज्ञान का संग्रह नहीं, बल्कि वह शक्ति है जो व्यक्ति और समाज दोनों को सही दिशा प्रदान करती है।

होसबाले ने कहा कि साहित्य व्यक्ति के भीतर मूल्य, दृष्टि और जीवन की सार्थकता विकसित करता है। ऐसे साहित्य की आवश्यकता है जो राष्ट्र, धर्म और समाज के प्रति समर्पण की भावना को सुदृढ़ करे। उनके अनुसार, साहित्य व्यक्ति के विचारों को परिष्कृत करता है और चरित्र-निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के विकास और समाज के उत्थान में साहित्य की भूमिका कभी कम नहीं आँकी जा सकती, क्योंकि वही विचारों को दिशा देकर व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाता है।
ज्ञान गंगा प्रकाशन द्वारा स्थापित—पाठकों के लिए नियमित रूप से खुली रहेगी दीर्घा
प्रताप गौरव केन्द्र के निदेशक अनुराग सक्सेना ने बताया कि केन्द्र के भामाशाह विक्रय केन्द्र में ज्ञान गंगा प्रकाशन के सहयोग से यह साहित्य दीर्घा स्थापित की गई है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय चिंतन से जुड़े साहित्य को एक स्थान पर उपलब्ध कराना है, ताकि पाठक नियमित रूप से यहां आकर अध्ययन कर सकें। दीर्घा में राष्ट्रवाद, संस्कृति, इतिहास और सामाजिक मूल्यों पर आधारित महत्वपूर्ण पुस्तकों का संग्रह रखा गया है।
सक्सेना के अनुसार, यह पहल केवल पुस्तक विक्रय तक सीमित नहीं, बल्कि उन पाठकों के लिए भी है जो अध्ययन–मनन की दृष्टि से गुणवत्तापूर्ण साहित्य खोजते हैं। दीर्घा अब प्रतिदिन निर्धारित समय में खुली रहेगी, जहां शोधार्थी, विद्यार्थी और सामान्य पाठक सभी आसानी से साहित्य का अवलोकन कर सकेंगे।
संघ पदाधिकारियों और स्थानीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी
उद्घाटन कार्यक्रम में संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। अखिल भारतीय सह-प्रचारक प्रमुख अरुण जैन, सामाजिक सद्भाव प्रमुख बलिराम, प्रांत संघचालक एडवोकेट जगदीश राणा और सहकार्यवाह नारायण गमेती कार्यक्रम में शामिल हुए।
इसके अलावा वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अध्यक्ष प्रो. भगवतीप्रकाश शर्मा, महामंत्री पवन शर्मा और कोषाध्यक्ष अशोक पुरोहित ने भी दीर्घा के शुभारंभ को समाज के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। आयोजकों ने माना कि यह दीर्घा युवाओं में साहित्य पढ़ने की संस्कृति को मजबूत करेगी और राष्ट्र-निर्माण संबंधी चिंतन को आगे ले जाएगी।










