(उजला दर्पण सीनियर रिपोर्टर रामगोपाल सिंह उईके)
सतना।
मध्य प्रदेश के सतना एयरपोर्ट से हाल ही में शुरू की गई क्षेत्रीय हवाई सेवा का पहला ही दिन फीका रहा। भोपाल के लिए निर्धारित फ्लाइट को यात्रियों के अभाव में रद्द करना पड़ा। 6 सीटर विमान में एक भी सवारी नहीं मिली, जिससे उड़ान बिना उड़ान ही लौट गई। यह स्थिति न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि केंद्र सरकार की ‘उड़ान योजना’ के प्रभाव पर भी सवाल खड़े करती है।
31 मई को हुआ था उद्घाटन
सतना से भोपाल, इंदौर और सिंगरौली के लिए ‘फ्लाई ओला’ द्वारा संचालित इस सेवा का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 मई को वर्चुअल माध्यम से किया था। सेवा सप्ताह में छह दिन संचालित होनी है, लेकिन पहले ही दिन इसकी शुरुआत असफल रही।
किराया और टाइमिंग बनीं सबसे बड़ी बाधा
स्थानीय यात्रियों के अनुसार फ्लाइट का किराया और समय दोनों ही अव्यवहारिक हैं।
भोपाल का एकतरफा किराया ₹3,500
इंदौर के लिए ₹5,400
वहीं, रेलगाड़ी जैसे कि रेवांचल एक्सप्रेस न केवल सस्ती है बल्कि सुविधाजनक समय पर भी चलती है।
विमान तो आया, लेकिन यात्री नहीं
पहले दिन भोपाल जाने वाली फ्लाइट रनवे पर तो पहुंची, लेकिन एक भी टिकट बुक नहीं हुआ। तकनीकी स्टाफ और पायलट मौजूद थे, लेकिन बोर्डिंग पास किसी को जारी नहीं किया गया।
प्रचार की कमी भी वजह
स्थानीय स्तर पर जानकारी और प्रचार की कमी भी इस असफल शुरुआत का एक कारण मानी जा रही है। बहुत से लोगों को नई सेवा की जानकारी ही नहीं थी।
स्थानीय लोगों की राय
नगरवासियों का मानना है कि यदि किराया ₹1,000 से ₹1,500 तक होता और समय व्यावहारिक रखा जाता, तो लोग निश्चित ही फ्लाइट का विकल्प चुनते। अभी के हालात में यह सेवा ‘हवा-हवाई’ बनकर रह गई है।
क्या योजना ठोस बदलाव ला पाएगी?
‘उड़ान’ जैसी योजनाओं का उद्देश्य छोटे शहरों को हवाई संपर्क देना है। लेकिन सवाल यह है कि क्या ज़मीनी जरूरतों की उपेक्षा कर केवल उद्घाटन समारोहों से बदलाव संभव है?













