06 साल की एक मासूम बच्ची को हवस का शिकार बनाकर उसकी हत्या कर देने वाले दरिंदे को फांसी की सजा सुनाई गई ।
कठोरतम दंड का ऐलान करते हुए जज साहब ने एक भावुक कविता भी पढ़ी।*
सिवनी मालवा की प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश न्यायमूर्ति तबस्सुम खान ने इस सनसनीखेज दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी अजय धुर्वे (30) को सजा सुनाई। मृत्युदंड की सजा के साथ ही उस पर 3000 रुपये के अर्थदंड भी लगाया गया। अदालत ने पीड़िता के माता-पिता को चार लाख रुपये का मुआवजा देने का भी फैसला सुनाया।
सजा सुनाते हुए न्यायाधीश तब्बसुम खान ने दिल्ली के निर्भया कांड को याद करते हुए एक कविता भी सुनाई। उन्होंने कहा…..
2 से 3 जनवरी 2025 की थी वो दरमियानी रात,
जब कोई नहीं था मेरे साथ.
इठलाती, नाचती छह साल की परी थी,
मैं अपने मम्मी-पापा की लाड़ली थी.
सुला दिया था उस रात बड़े प्यार से मां ने मुझे घर पर,
पता नहीं था नींद में मुझे ले जाएगा.
“वो” मौत का साया बनकर.
जब नींद से जागी तो बहुत अकेली और डरी थी मैं,
सिसकियां ले लेकर मम्मी-पापा को याद बहुत करी थी मैं.
न जाने क्या-क्या किया मेरे साथ,
मैं चीखती थी, चिल्लाती थी, लेकिन किसी ने न सुनी मेरी आवाज.
थी गुड़ियों से खेलने की उम्र मेरी,
पर उसने मुझे खिलौना बना दिया.
“वो” भी तो था तीन बच्चों का पिता,
फिर मुझे क्यों किया अपनों से जुदा.
खेल खेलकर मुझे तोड़ दिया,
फिर मेरा मुंह दबाकर, मरता हुआ झाड़ियों में छोड़ दिया.
हां मैं हूं निर्भया,
हां फिर एक निर्भया,
एक छोटा सा प्रश्न उठा रही हूं.
जो नारी का अपमान करे,
क्या वो मर्द हो सकता है …?
क्या जो इंसाफ निर्भया को मिला..?
वह मुझे मिल सकता है….?












