आदिवासियों की जमीन को गौर परिवार ने कराई फर्जी तरीके से रजिस्ट्री।

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1 नर्मदापुरम में जमीन हड़पने का बड़ा घोटाला! गौर परिवार के खिलाफ आदिवासियों का बड़ा आरोप
2. *नर्मदा पुरम में जमीन घोटाले का भंडाफोड़! गौर परिवार की मिलीभगत का आरोप, जानें पूरी कहानी ।
3. *आदिवासियों की जमीन पर गौर परिवार का अवैध कब्जा! नर्मदा पुरम में बड़ा विवाद, क्या है सच्चाई? 
नर्मदा पुरम में आदिवासियों की जमीन हड़पने का बड़ा खेल ।

नर्मदा पुरम कलेक्टर सोनिया मीणा के कार्य क्षेत्र में आदिवासियों की जमीन के साथ फर्जी रजिस्ट्री कराकर लोग मनमानी कर रहे हैं। गौर परिवार के लोग यूइके परिवारों की जमीन को हड़प कर अपने नाम कर रहे हैं। इसके लिए वे गुंडे-गर्दी की दम पर और अधिकारियों की सह पर जमीन की फर्जी रजिस्ट्री करवा रहे हैं।

उजाला दर्पण की टीम ने नर्मदा पुरम की सुहागपुर और सिवनी मालवा तहसील में जमीनी स्तर पर जांच की, जहां कई ऐसे प्रकरण सामने आए जिसमें आदिवासियों की जमीन की रजिस्ट्री 1000 और 500 के स्टांप पेपर में इकरारनामा के तहत कर ली जाती है। इसके अलावा, जिनकी जमीन है, उन्हें पैसा भी नहीं दिया जाता है और न ही सरकार का टैक्स चुकाया जाता है।

मध्य प्रदेश राज्य मानव अधिकार संगठन ने इन प्रकरणों को लेकर केस लड़ना शुरू कर दिया है और जल्द ही इन प्रकरणों का खुलासा करेगा।

दादागिरी के दम पर आदिवासियों को जान से मारने की धमकी दी जाती है और उनकी जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम कर ली जाती है।

यह सवाल उठता है कि जब आदिवासियों की जमीन की रजिस्ट्री किसी गैर आदिवासी के नाम पर हो ही नहीं सकती, तो कौन सा अधिकारी और प्रशासन है जो कलेक्टर सोनिया मीणा के कार्य क्षेत्र में आदिवासियों की जमीन की रजिस्ट्री करने का आदेश देता है? ¹

सरकार आदिवासियों के उत्थान और उनके विकास की बात करती है, लेकिन अधिकारी और प्रशासनिक कर्मचारी गैर कानूनी तरीके से उनकी जमीन को हथियाने और फर्जी तरीके से नामांकन कर जमीन का नामांतरण करवा लेते हैं। ²

नर्मदा पुरम के कई तहसील और ब्लॉक में आदिवासियों की जमीन को गैर आदिवासी द्वारा हनन कर लिया गया है, लेकिन इसकी जानकारी न तो शासन को है और न ही प्रशासन को। इनमें केसला, सिवनी मालवा, डोलरिया, सुहागपुर आदि शामिल हैं।

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