भोपाल में 5 सितंबर को होगा शिक्षक संदर्भ समूह का स्थापना दिवस समारोह

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( उजला दर्पण सीनियर रिपोर्टर मध्य प्रदेश )

शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह को भेजा गया विशेष आमंत्रण, प्रदेशभर से आएंगे शिक्षाविद और नवाचारी शिक्षक

भोपाल।”शिक्षा केवल ज्ञान नहीं, बल्कि संस्कार और चेतना का नाम है — और उसी चेतना को जीवंत रखने की एक सशक्त कोशिश है शिक्षक संदर्भ समूह।”

यही भाव लेकर गठित हुआ यह समूह अब अपने 15वें स्थापना दिवस पर पहुँच चुका है, और इस विशेष अवसर को राजधानी भोपाल में मनाने की तैयारियाँ जोरों पर हैं।

मध्य प्रदेश के शिक्षकों में रचनात्मकता, संवाद और आत्म-सशक्तिकरण की अलख जगाने वाला शिक्षक संदर्भ समूह इस वर्ष 5 सितंबर 2025 को अपना स्थापना दिवस मना रहा है। यह तारीख अपने आप में प्रतीकात्मक भी है — क्योंकि इसी दिन देशभर में शिक्षक दिवस भी मनाया जाता है, जो शिक्षा के प्रति समर्पण और शिक्षकों के योगदान का सम्मान करने का दिन है।

समारोह राजधानी भोपाल में भव्य रूप से आयोजित होगा। इस अवसर पर समूह ने मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है।

2010 में हुई थी शुरुआत

समूह के संस्थापक डॉ. दामोदर जैन द्वारा भेजे गए आमंत्रण पत्र में बताया गया है कि शिक्षक संदर्भ समूह का गठन वर्ष 2010 में हुआ था। शुरुआत में इसका उद्देश्य शिक्षकों के मनोबल को बढ़ाना और कक्षा शिक्षण को गौरवपूर्ण बनाना था, लेकिन समय के साथ यह केवल एक मंच न रहकर एक आंदोलन का रूप ले चुका है।

डॉ. जैन के अनुसार, शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक बदलाव तभी संभव है जब शिक्षक खुद अपनी भूमिका पर गर्व करें और शिक्षण को एक साधना मानें। यही कारण है कि समूह लगातार शिक्षकों को आत्म-मूल्यांकन और नवाचार की दिशा में प्रेरित करता रहा है।

आंदोलन की तरह काम करता है यह मंच

डॉ. जैन ने अपने संदेश में लिखा है — “शिक्षक संदर्भ समूह केवल कार्यक्रम आयोजित करने वाला संगठन नहीं है, यह शिक्षकों के हाथों शिक्षा व्यवस्था के अंदरूनी रूपांतरण की बुनियाद रख रहा है।”

समूह का लक्ष्य है कि हर शिक्षक ‘बाल देवो भव’ की भावना को आत्मसात करे और सरकारी स्कूलों को ‘आनंद घर’ में बदलने की दिशा में प्रयास करे।

आनंद घर’ की परिकल्पना में केवल किताबों और परीक्षाओं पर ज़ोर नहीं, बल्कि बच्चों की जिज्ञासा, रचनात्मकता और भावनात्मक विकास को केंद्र में रखा जाता है।

मेरा विद्यालय मेरी पहचान’ और ‘गिजूभाई सम्मान’

समूह की सबसे चर्चित पहल ‘मेरा विद्यालय मेरी पहचान’ अभियान है। इसके तहत वे शिक्षक सम्मानित होते हैं जो अपने विद्यालय को नवाचार, रचनात्मकता और छात्र-केंद्रित गतिविधियों से संवारते हैं। इस सम्मान का नाम महान शिक्षाविद गिजूभाई बधेका के नाम पर रखा गया है, जिन्हें बाल शिक्षा में क्रांतिकारी प्रयोगों के लिए जाना जाता है।

‘गिजूभाई सम्मान’ प्राप्त करने वाले शिक्षक न केवल अपने विद्यालय के वातावरण को बेहतर बनाते हैं, बल्कि आसपास के स्कूलों के लिए भी प्रेरणा बनते हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर सक्रिय योगदान

शिक्षक संदर्भ समूह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP-2020) के क्रियान्वयन में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। समूह समय-समय पर शिक्षकों के लिए चिंतन-परिचर्चाएं, प्रशिक्षण सत्र, और कार्यशालाएं आयोजित करता है, ताकि नई नीति की भावना को जमीनी स्तर पर लागू किया जा सके।

इन चर्चाओं में सिर्फ सैद्धांतिक बातें नहीं होतीं, बल्कि व्यावहारिक सुझाव और अनुभव साझा किए जाते हैं — जैसे स्थानीय भाषा में शिक्षा, खेल और गतिविधियों के माध्यम से सीखना, और जीवन-कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना।

5 सितंबर को होगा प्रदेशव्यापी मिलन

आगामी 5 सितंबर का आयोजन सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि प्रदेशभर के शिक्षकों का मिलन मंच होगा। इसमें मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाले शिक्षक, शिक्षाविद, और शैक्षिक नवाचारकर्ता शामिल होंगे।

कार्यक्रम की रूपरेखा के अनुसार —

उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों का सम्मान

नवाचार आधारित शिक्षण मॉडल की प्रस्तुतियाँ

शिक्षा के भविष्य पर खुला संवाद प्रेरक वक्तव्य और अनुभव साझा करना

समूह का मानना है कि ऐसे मंच पर शिक्षक एक-दूसरे से सीख सकते हैं और अपनी कार्यशैली में सुधार ला सकते हैं।

मंत्री की उपस्थिति को मिला विशेष महत्व

डॉ. दामोदर जैन ने शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह को लिखे आमंत्रण में कहा है कि उनकी उपस्थिति इस आयोजन की गरिमा को नई ऊँचाई देगी। मंत्री से यह अपेक्षा भी जताई गई है कि वे शिक्षकों को प्रेरित करने के साथ-साथ उनकी चिंताओं और सुझावों को भी गंभीरता से सुनें।

क्यों खास है यह आयोजन

इस वर्ष का स्थापना दिवस समारोह इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि यह ऐसे समय में हो रहा है जब पूरे देश में शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने के प्रयास तेज़ हैं। डिजिटल शिक्षा, कौशल आधारित शिक्षा और स्थानीय संदर्भ में शिक्षण पद्धतियों पर ज़ोर दिया जा रहा है।

इन बदलावों में शिक्षकों की भूमिका सबसे निर्णायक है — और शिक्षक संदर्भ समूह का मानना है कि जब तक शिक्षक खुद बदलाव के वाहक नहीं बनेंगे, तब तक कोई भी नीति प्रभावी नहीं हो पाएगी।

शिक्षकों की आवाज़ को मंच

समूह की एक और खासियत यह है कि यह केवल नीति-निर्माताओं से संवाद नहीं करता, बल्कि शिक्षकों के बीच भी संवाद की संस्कृति को बढ़ावा देता है। यहाँ शिक्षक अपनी चुनौतियों, अनुभवों और सफलताओं को खुलकर साझा करते हैं।

डॉ. जैन कहते हैं, “जब एक शिक्षक अपने विद्यालय की कहानी दूसरे शिक्षक को सुनाता है, तो वह प्रेरणा किसी भी किताब से ज्यादा असर करती है।”

आगे की दिशा

स्थापना दिवस के बाद समूह का इरादा है कि प्रत्येक जिले में ‘शिक्षक नवाचार मंच’ का गठन किया जाए, ताकि शिक्षकों के बीच यह संवाद लगातार चलता रहे। इसके अलावा, ‘गिजूभाई सम्मान’ को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की योजना भी बनाई जा रही है।

5 सितंबर को होने वाला यह आयोजन न केवल एक स्मरणीय अवसर होगा, बल्कि यह साबित करेगा कि शिक्षा सुधार की असली चाबी उन्हीं के हाथ में है जो रोज़ाना बच्चों के बीच होते हैं — यानी हमारे शिक्षक।

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