खाटूधाम, राजस्थान | विशेष संवाददाता राजस्थान के सीकर जिले स्थित खाटूधाम में आयोजित लख्खी फाल्गुन मेला 2026 इस समय अपने चरम पर है। रिंगस से लेकर खाटू श्याम मंदिर तक श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ रहा है। इस वर्ष मेले की खास पहचान बनकर उभरे हैं “धुरंधर” श्याम रत्न पप्पू शर्मा, जिनके भजनों की गूंज पूरे खाटूधाम में सुनाई दे रही है।
रिंगस से खाटू तक भक्ति का सैलाब
फाल्गुन मेले के दौरान हजारों श्रद्धालु हाथों में निशान लिए पैदल यात्रा कर बाबा श्याम के दरबार तक पहुंच रहे हैं। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह कीर्तन, भजन संध्या और भक्ति संगीत के आयोजन हो रहे हैं। इस बार पंडालों और डीजे वाहनों पर पप्पू शर्मा के भजन प्रमुख रूप से सुनाई दे रहे हैं, जिन पर श्रद्धालु झूमते नजर आ रहे हैं।
सुपरहिट भजनों की धूम
मेले से पहले ही पप्पू शर्मा की टीम ने चार प्रमुख भजन रिलीज किए—
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हेलो आयो श्याम धणी को
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होली खेले सांवरियों सेठ खाटू नगरी में
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खूब साज्यो सिंगार
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चलो कीर्तन कारवां
ये भजन वर्तमान में मेले की पहचान बन चुके हैं। आयोजकों के अनुसार, मेले के समापन के बाद चार और नए भजन श्रद्धालुओं के लिए जारी किए जाएंगे।
सोशल मीडिया पर ट्रेंड
फाल्गुन मेला 2026 का उत्साह सोशल मीडिया पर भी साफ दिखाई दे रहा है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर पप्पू शर्मा के भजनों की रील्स और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि लंबे समय बाद भक्ति और आधुनिक संगीत का ऐसा संतुलित संगम देखने को मिला है, जिसने युवा वर्ग को भी बड़े स्तर पर जोड़ा है।
‘श्री श्याम कथा’ का विशेष आयोजन
भजनों के साथ इस बार श्रद्धालुओं के लिए कथा का भी विशेष आयोजन रखा गया है। स्वदेशी जागरण मंच के तत्वाधान में 25, 26 और 27 फरवरी 2026 को स्वदेशी मेला ग्राउंड (तोरण द्वार के समीप) ‘श्री श्याम कथा’ का आयोजन किया जा रहा है। कथा को लेकर भक्तों में उत्साह देखा जा रहा है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं।
प्रशासन अलर्ट मोड पर
भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और आयोजन समिति पूरी तरह सक्रिय हैं। सुरक्षा, यातायात नियंत्रण, चिकित्सा सुविधा और भीड़ प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
फाल्गुन मेला 2026 केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और भक्ति संगीत का भी बड़ा मंच बन गया है। “धुरंधर” श्याम रत्न पप्पू शर्मा की प्रस्तुतियों ने इस बार मेले को एक नई पहचान दी है। खाटूधाम में गूंजते भजनों ने यह साबित किया है कि भक्ति और संगीत का संगम आज भी लाखों लोगों को एक सूत्र में जोड़ने की ताकत रखता है।










