— उजला दर्पण रिपोर्टिंग डेस्क | जबलपुर | नगर निगम जबलपुर एक ओर ‘स्वच्छता मिशन’ की बैठकों और फोटो सेशनों में व्यस्त है, वहीं ज़मीन पर हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि लोग गंदगी से बीमार पड़ने लगे हैं। ज़ोन 14, खासकर राजीव गांधी नगर की गली नंबर 5, इसका सबसे ताज़ा उदाहरण बन गया है — जहां नालियां उफान पर हैं, गलियां बदबू से भरी हैं और अफसरों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा।
न शिकायत सुनते, न सफाई करते
गली नंबर 5 के निवासी शंकर लाल पटेल और भारतीय विश्वकर्मा महीनों से शिकायतें कर रहे हैं। लेकिन उनका कहना है कि न सफाईकर्मी सुनते हैं, न अधिकारी। कई बार शिकायत करने पर भी गाड़ी आती है, एक नजर डालती है और बिना झाड़ू लगाए लौट जाती है।
जब लोग जवाब मांगते हैं तो डांट पड़ती है—“बहुत सवाल मत पूछो, हमें पता है क्या करना है।”
यह जवाब जनता नहीं, किसी तानाशाही व्यवस्था का प्रतीक लगता है।
कचरा गाड़ी गायब, सफाई दिखावटी
रहवासियों के अनुसार:-
-
कचरा गाड़ी हफ्तों तक नहीं आती
-
नालियां महीनों से भरी पड़ी हैं
-
गलियों में झाड़ू नहीं लगती
-
लोग मजबूरी में कचरा नालियों या खाली प्लॉटों में फेंकते हैं
पूरे मोहल्ले में बदबू इतनी है कि दरवाजे खोलना मुश्किल हो गया है। बच्चे गिरकर घायल हो रहे हैं, लेकिन निगम को कोई चिंता नहीं।
सीएसआई के दावे, ज़मीन पर जीरो
जोन 14 के सीएसआई आनं
द राव का दावा है—“सफाई हो रही है, गाड़ियां जा रही हैं, नालियां साफ हैं।”
सवाल ये है—क्या पूरा मोहल्ला झूठ बोल रहा है? क्या यह भी “नई जॉइनिंग” का बहाना है, जैसा हर नए अफसर के आने पर होता है?
रहवासियों का साफ कहना है—“सीएसआई बदलते हैं, बहाने नहीं बदलते।”
बरसात आई, महामारी तय
मौसम बदल रहा है। बरसात आते ही ये भरी हुई नालियां घरों में घुसेंगी, और तब फैलेगा मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड।
पानी का बहाव रुक चुका है, नालियों की सफाई नहीं हुई—बीमारी तय है, अगर वक्त रहते जागा नहीं गया।
अब सवाल नगर निगम से है – कब जागोगे?
क्या ज़ोन 14 के अफसरों को जनता की नहीं, सिर्फ फाइलों की फिक्र है?
क्या कमिश्नर की नजर सिर्फ रैंकिंग और प्रेस रिलीज़ तक ही सीमित है?
जनता पूछ रही है:
-
क्या हम सिर्फ टैक्स भरने के लिए हैं?
-
क्या गंदगी में जीना हमारी मजबूरी बन चुकी है?
-
क्यों ज़मीन पर कार्रवाई नहीं, सिर्फ दावा और ड्रामा?
राजीव गांधी नगर की गलियां नगर निगम के लिए एक आइना हैं—जो दिखा रहा है कि तस्वीर कितनी गंदी है, और सिस्टम कितना लापरवाह। अब निगम चाहे तो इसे साफ कर सकता है, वरना जनता के सब्र का बांध अब टूटने को है।
सवाल फिर वही है—नगर निगम, अब भी नहीं जागे तो कब?












