जयपुर/पिलानी, 14 नवंबर।CSIR–सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (CSIR–CEERI), पिलानी और विज्ञान भारती (विभा), राजस्थान द्वारा आयोजित इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (IISF–2025) के कर्टन रेज़र कार्यक्रम ने शुक्रवार को देश के सबसे बड़े विज्ञान उत्सव की औपचारिक शुरुआत कर दी। “विज्ञान से समृद्धि: आत्मनिर्भर भारत के लिए” थीम पर आधारित यह आयोजन विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार को समाज, उद्योग और शिक्षा जगत से जोड़ने की एक व्यापक पहल है। हाइब्रिड मोड में आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों के 120 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और उद्घाटन वक्तव्य के साथ हुई, जिसके बाद CSIR–CEERI के निदेशक डॉ. पी. सी. पंचरिया ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने भारत के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार क्षेत्र में हो रही तेज प्रगति—इलेक्ट्रॉनिक्स, अंतरिक्ष, रक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और ऊर्जा अनुसंधानों—का उल्लेख करते हुए कहा कि देश आत्मनिर्भर अनुसंधान क्षमताओं के साथ वैश्विक वैज्ञानिक शक्ति के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि CEERI राष्ट्रीय विज्ञान तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और उन्नत शोध, तकनीक विकास एवं मानव संसाधन निर्माण में अपना योगदान लगातार बढ़ा रहा है।
IISF–2025 की थीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस दृष्टि से प्रेरित है जिसमें विज्ञान को प्रगति, सतत विकास और मानवता की सेवा का माध्यम माना गया है। इस अवसर पर केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के संदेश का उल्लेख किया गया, जिसमें उन्होंने कहा कि “हर वैज्ञानिक खोज का लाभ समाज तक पहुँचना चाहिए।” उन्होंने अकादमिक जगत, उद्योग और स्टार्टअप्स के बीच मजबूत सहयोग को भारत की भविष्य अर्थव्यवस्था की अनिवार्य आवश्यकता बताया।
कार्यक्रम में IISF–2025 के राष्ट्रीय समन्वयक (S&T Hackathon) और विज्ञान भारती के सचिव डॉ. मेघेंद्र शर्मा ने आगामी फेस्टिवल के स्वरूप, थीम, तकनीकी सत्रों और प्रमुख आयोजनों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि इस बार के उत्सव में विज्ञान ग्राम, युवा वैज्ञानिक सम्मेलन, एंबैसडर्स मीट, AI–AGI, क्वांटम टेक्नोलॉजी, जैव अर्थव्यवस्था, उभरती दूरसंचार प्रौद्योगिकियाँ, सेमीकंडक्टर, जलवायु परिवर्तन, स्टार्टअप जर्नीज़, क्लीन एनर्जी, विज्ञानिका, मीडिया कॉन्क्लेव, राष्ट्रीय सामाजिक संगठनों की बैठक, साइंस सफारी और विज्ञान–रक्षा–अंतरिक्ष प्रदर्शनी जैसे अनेक प्रमुख आयोजन शामिल होंगे।
मुख्य अतिथि डॉ. अनूप एस. महाजन (वैज्ञानिक–F, IITM पुणे) ने भारत की जलवायु विज्ञान, वायुमंडलीय शोध और पर्यावरणीय मॉडलिंग के क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने युवाओं को बहु-विषयी अनुसंधान और जलवायु-लचीली तकनीकों के विकास के लिए प्रेरित किया।
विशिष्ट अतिथि डॉ. संजीव शर्मा (कुलपति, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर) ने भारतीय पारंपरिक ज्ञान—आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा—को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ते हुए समग्र, सतत एवं स्वदेशी समाधान विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम का सफल समन्वयन CSIR–CEERI के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. विजय चटर्जी ने किया। समापन सत्र में वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक साई के. वड्डाडी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
यह कर्टन रेज़र IISF–2025 की आधारशिला स्थापित करता है और देश के छात्रों, वैज्ञानिकों, नवप्रवर्तकों एवं शोधकर्ताओं को विज्ञान-आधारित राष्ट्र निर्माण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करता है। CSIR–CEERI ने कहा कि संस्था विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से “विज्ञान से समृद्धि” के राष्ट्रीय लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए पूर्णत: प्रतिबद्ध है।










