सी एस आई और नगरनिगम स्वास्थ्य अधिकारी मिलकर जगह जगह खुले में डलवाते हैं कचरा।
स्वच्छता सर्वेक्षण के नाम पीटते है ढिंढोरा, जबलपुर बनेगा नम्बर वन।

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शिकायत करने पर उतर आते हैं गुंडागर्दी में , नगर निगम कमिश्नर का भी नहीं है डर।
नगर निगम कर्मचारी स्वयं करवाते हैं गंदगी, कचरे का लगा है अंबर बेजुबान जानवरों के जीवन के साथ हो रहा खिलवाड़।
एक तरफ नगर निगम स्वच्छता अभियान की पहल जगाने का दिखावा कर रहा है दूसरी तरफ वही नगर निगम के आला अधिकारी जोन क्रमांक 2 के विष्णु कांत दुबे और स्वास्थ्य अधिकारी संदीप जायसवाल, और अभिनव मिश्रा के मिलीभगत से स्वच्छता के नाम पर गंदगी फैला रहे हैं।
यदि गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ यानी जो नगर निगम की कचरा गाड़ियां आकर के गंदगी फैलाती हैं या शहर का कचरा इकट्ठा करके इधर-उधर फेंक देती है उसकी जानकारी यदि जोन के सी एस आई और नगरनिगम स्वास्थ्य अधिकारियों को दिया जाता है या सुपरवाइजर को दिया जाता है तो वह कोई भी कार्रवाई नहीं करते ना ही साफ सफाई करवाते हैं , ना ही वह कचरा इकट्ठा करके कचरा प्लांट भेजते हैं।
जब कोई सर्वेक्षण होता है तभी कुछ समय के लिए साफ सफाई करवाते है और जांच टीम जाने के बाद कुछ ही देर में लगता है कचरे का अंबार।
नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी संदीप जयसवाल और साथ ही अभिनव मिश्रा से बात हुई उसके बाद सीएस आई विष्णुकांत दुबे से बात हुई , सभी ने एक दूसरे पर बात डालते हुए बात घुमा दिए और साथ और बोला गया कि यह हमारे कार्य क्षेत्र से बाहर है हमारी कोई नहीं सुनता है।
सुपरवाइजर स्वयं मुंह घुमा लेते हैं और कचरा गाड़ी से कचरा डलवाते हैं जैसे ही कचरा गाड़ी कचरा डाल देती है उसके बाद सुपरवाइजर सामने आते है कुछ नहीं बोलते क्योंकि उनकी सह पर सब कुछ होता है।
कई बार सुपरवाइजर से बोला गया कि यह गाड़ियां यहां पर कचरा डाल जाती है ऐसा क्यों होता है तो वह आना-कानी करके बोलता है कि हमारे जोन की गाड़ियां नहीं है।
कचरा प्लांट रानीताल मुक्तिधाम के पास बना है और उसी के सामने कचरा डंप कर दिया जाता है। टैंक से निकला मलवा और मांस मछ्ली मुर्गी आदि सड़ेगले अवशेष खुले में डाला गया है। चारों तरफ हवा में बदबू फैल रही है।
जोन क्रमांक 2 , 05 और 13 के अधिकारियों से बात करने पर उनके द्वारा बोला जाता है कि यह गाड़ी हमारे जोन की नहीं है तो फिर यदि उनके जोन की गाड़ियां नहीं है तो वह दूसरे जोन की गाड़ियां जॉन क्रमांक 2 में कचरा क्यों डालकर कहीं भी जाती है ।
क्या कचरा प्लांट भेजने का कोई प्रावधान नहीं है ।
क्या बेजुबान जानवरों के साथ खिलवाड़ ऐसा होता ही रहेगा। क्या गंदगी का अंबार स्वयं नगर निगम फैलाता ही रहेगा ।
वही आप तस्वीरों में साथ देख सकते हैं कि बेजुबान जानवर और गोवंश उस कचरे को खा रही है और कचरे के साथ-साथ प्लास्टिक खाती है जिससे बेजुबानों के पेट में है प्लास्टिक जाता है और जहर बनता है जिससे उनकी मृत्यु होती है इसका जिम्मेदार आखिर कौन है ?
क्या नगर निगम अधिकारी ऐसे ही सोते रहेंगे?
क्या जोन के दायित्व वान अधिकारी एक दूसरों पर दोषारोपण करते रहेंगे कि यह हमारे जोन की गाड़ियां नहीं है ।
अब देखते हैं कि नगर निगम के स्वच्छता अधिकारी या जॉन के अधिकारी आखिर क्या करते हैं शहर के साफ-सफाई करवाते हैं या ऐसे ही कचरा इधर-उधर डलवाते रहेंगे।
या अपनी सहमति और मिलीभगत में नगरनिगम को चूना लगाते रहेंगे।












