रानीताल मुक्तिधाम में संत की तस्वीर से विवाद, लोगों ने कहा — धर्म और आस्था के नाम पर मनमानी बर्दाश्त नहीं

| रानीताल स्थित मुक्तिधाम में बन रहे नए हॉल की दीवारों पर पेंटिंग का काम इन दिनों चर्चा में है। भगवान शिव को महाकाल रूप में चित्रित किया गया है — जो इस स्थान की पवित्रता और उद्देश्य से मेल खाता है। लेकिन विवाद तब खड़ा हुआ जब एक दीवार पर वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज की तस्वीर उकेर दी गई।
स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गहरी नाराज़गी है। उनका कहना है कि मुक्तिधाम मोक्ष का स्थान होता है, यहां संतों की तस्वीर लगाना न परंपरा में है, न मर्यादा में। यह न सिर्फ धार्मिक भावनाओं का उल्लंघन है, बल्कि खुद संत प्रेमानंद का भी अनजाने में अपमान है।
लोगों का सीधा आरोप है — “नगर निगम ने बिना सोचे-समझे, अपने मन से यह सब कराया है। आस्था और धर्म कोई रंगाई-पुताई का मैदान नहीं है।”
यही नहीं, सवाल यह भी उठ रहे हैं कि संस्कारधानी जबलपुर की पहचान जिन धार्मिक मूल्यों, मर्यादा और संस्कृति से है, क्या वो अब धीरे-धीरे खत्म की जा रही है?
“मुक्तिधाम जैसे पवित्र स्थल पर अगर मनमानी शुरू हो गई, तो फिर बाकी जगहों का क्या होगा?” — एक बुज़ुर्ग स्थानीय निवासी की यही चिंता है।
नगर निगम और निर्माण से जुड़े अधिकारी फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं। लेकिन इलाके में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। लोगों की मांग है कि संत की तस्वीर को तुरंत हटाया जाए और भविष्य में धार्मिक स्थलों पर ऐसे निर्णय लेने से पहले धार्मिक जानकारों और समाज से सलाह ली जाए।
संस्कारधानी जबलपुर में धर्म और आस्था से जुड़ी मर्यादाएं अगर यूं ही दरकिनार होती रहीं, तो इसका असर सिर्फ एक दीवार तक सीमित नहीं रहेगा — यह परंपरा और पहचान दोनों के लिए खतरे की घंटी है।












