( अंकित सेन /उजला दर्पण )
जबलपुर नगर निगम का जोन क्रमांक-02 लंबे समय से भ्रष्टाचार और मनमानी का अड्डा बना हुआ है। यहाँ वर्षों से जमे अमन चतुर्वेदी पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। सफाईकर्मियों से अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना उनकी आदत बन चुकी है। गाड़ियों, जेसीबी और डंपर की आवाजाही में मनमर्जी चलती है, वार्ड की ज़रूरतों को ताक पर रखकर अपने हिसाब से वाहन भेजे जाते हैं।
जोन प्रभारी 14 भी सवालों के घेरे में हैं। इलाके में गंदगी जस की तस पड़ी रहती है, लेकिन साफ जगहों पर झाड़ू लगवाकर फोटो खींच ली जाती है और उसे रिपोर्ट में दर्ज कर दिया जाता है। यह पूरा सिस्टम सिर्फ दिखावे पर टिक गया है।
सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा लेबर मस्टरोल में है। प्रतिदिन मुश्किल से 10–12 सफाईकर्मी काम पर आते हैं, लेकिन मस्टरोल में 40 से ज्यादा नाम दर्ज कर दिए जाते हैं। यानी हर रोज फर्जी हाजिरी और भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा है।
सवाल यह है कि कमिश्नर जबलपुर नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी आखिर कब संज्ञान लेंगे? क्या अमन चतुर्वेदी की मनमानी इसी तरह चलती रहेगी? क्या उच्च अधिकारियों से कोई सांठगांठ है, जिसकी वजह से वर्षों से वे इसी जोन में जमे हुए हैं? और क्या कभी आदेश निकल पाएगा कि वे जोन-2 से हटकर अन्य जोनों की ओर जाएं?
इसकी जानकारी उजला दर्पण समाचार पत्र के स्टेट हेड के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग की अधिकारी अंकिता बर्मन को भी दी जा चुकी है। अब देखना यह होगा कि इस भ्रष्टाचार और लापरवाही की जांच होगी या फिर यह खेल यूं ही जारी रहेगा











