सीएम हेल्पलाइन वापस कर बोले, हम करेंगे निपटारा!” – पुलिस का झूठा वादा , SI दिनेश गौतम और थाना प्रभारी संजीवनी नगर आशीष को नहीं दिला पाए न्याय।
धोखाधड़ी और प्रशासनिक लापरवाही का शिकार: आशीष कुमार प्रजापति की लाखों की जमीन डील में ठगी, 2 साल से न्याय की गुहार!”
जबलपुर, मध्य प्रदेश: धनवंतरी नगर स्थित 18 वर्ग मीटर की दुकान की खरीदारी को लेकर आशीष कुमार प्रजापति (निवासी: पनागर वार्ड क्रमांक-7) ने विपिन लोधी, दिनेश लोधी और राजेश लोधी के खिलाफ धोखाधड़ी, रजिस्ट्री न करने और 20 लाख रुपये वापस न देने का गंभीर आरोप लगाया है। आशीष का कहना है कि “राजनीतिक दबाव और पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत”के चलते उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है।
बार बार आशीष को पुलिस थाना बुलाया जाता है, और यह कहकर लौटा दिया जाता है कि अगली पार्टी तो मोबाइल बंद कर रखी या वह बुलाने पर आता ही नहीं है।
और आशीष प्रजापति निराश होकर लौट आता है।
*क्या हुआ मामला?
– 30 अप्रैल 2023 को आशीष ने लोधी परिवार से 20 लाख रुपये में दुकान खरीदने का **रजिस्टर्ड एग्रीमेंट किया।
-13 लाख रुपये** HDFC बैंक के माध्यम से RTGS से भुगतान किया गया, शेष 7 लाख रुपये 11 महीने में देकर रजिस्ट्री पूरी करने का वादा था।
– लेकिन, लोधी परिवार ने न तो रजिस्ट्री की और न ही पैसे वापस किए।
शिकायतों के बावजूद नहीं मिला इंसाफ
आशीष ने कथित धोखाधड़ी के खिलाफ , *एसपी कार्यालय, आईजी कार्यालय, कलेक्टर कार्यालय और सीएम हेल्पलाइन** (दो बार) तक शिकायत की, लेकिन:
– थाना पनागर में नेताओं के दबाव में मामला दबाने की कोशिश हुई।
– वर्तमान में विगत दिनों SI दिनेश गौतम धनवंतरी पुलिस चौकी में पदस्थ और संजीवनी नगर थाना प्रभारी ने “सीएम हेल्पलाइन वापस लेने” के लिए दबाव डाला, और वापस कर बोले कि निराकरण करके देंगे लेकिन समस्या का निराकरण नहीं हुआ।
– 2 साल बीत गए लेकिन न तो पैसे वापस मिले और न ही रजिस्ट्री हुई।
“अब इच्छा मृत्यु ही एकमात्र रास्ता!” – आशीष
आशीष ने बताया कि उन्होंने बाजार से कर्ज लेकर यह डील की थी, लेकिन अब कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। उन्होंने मानवाधिकार संगठन से गुहार लगाई कि “अगर जल्द न्याय नहीं मिला, तो वे भारत सरकार से इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगेंगे।”
सवाल प्रशासन पर:
1. क्यों नहीं हुई धोखाधड़ी करने वालों पर कारवाही।
2. किसके दबाव में पुलिस और प्रशासन चुप है?
3. क्या नेताओं और थाने की मिलीभगत से आम आदमी को न्याय नहीं मिलेगा?
4. क्या पुलिस थाना प्रभारी से भी पावर फुल है धोखाधड़ी करने वाले।
अब देखना है कि मध्य प्रदेश सरकार और मानवाधिकार संगठन इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाते हैं!
संबंधित अधिकारियों से अपील: जल्द से जल्द आशीष को न्याय दिलाएं, अन्यथा यह मामला “प्रशासनिक विफलता और भ्रष्टाचार” का बड़ा उदाहरण बन जाएगा!












