बैतूल: जिला स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ कर्मचारी गोपाल मालवीय का अहंकार बुधवार को उस वक्त खुलकर सामने आ गया, जब उसने एक वरिष्ठ पत्रकार को न सिर्फ खुलेआम धमकाया, बल्कि अभद्र भाषा का जमकर इस्तेमाल भी किया।
घटना बैतूल जिले के एक गांव की है, जहां रिपोर्टिंग के सिलसिले में पहुंचे वरिष्ठ पत्रकार रामगोपाल सिंह ऊईके का सामना गोपाल मालवीय से हुआ। बातचीत के दौरान मालवीय ने मर्यादाएं लांघते हुए कहा – “तुम जैसे पत्रकार 100 मेरे आगे-पीछे घूमते हैं… जो करना है कर लो, मेरा कोई कुछ नहीं उखाड़ सकता।”
पत्रकार द्वारा सम
झाने की कोशिश की गई कि भाषा और व्यवहार में संयम ज़रूरी है, लेकिन मालवीय ने अपनी अकड़ नहीं छोड़ी। उसने खुद को सेनेटरी विभाग का कर्मचारी बताते हुए कहा कि न तो उसे कोई कुछ कर सकता है क्योंकि मैं सब पैसों से खरीद लेता हु, न ही वह किसी से डरता है।
मामला यहीं नहीं रुका। जब उजाला दर्पण के स्टेट हेड ने सामान्य लहजे में पूरे मामले की जानकारी लेनी चाही, तो गोपाल मालवीय ने बोला की बेतुल जिला हॉस्पिटल में पदस्थ हु, उसके बाद बोला की padhar हॉस्पिटल मे हु।ऐसे बातों में घुमाता रहा। यहाँ भी वही रुख अपनाया। फोन पर दो टूक बोलते हुए कहा – “तुम मुझे क्यों फोन कर रहे हो, जो करना है कर लो।” और अकड़ भरे अंदाज़ में कॉल काट दिया। यह बातचीत रिकॉर्डिंग के रूप में मौजूद है।
पूरा मामला उजाला दर्पण के स्टेट हेड द्वारा बैतूल जिला के CHMO तक पहुंचाया गया। CHMO राजेश परिहार को जब इसकी जानकारी दी गई तो उन्होंने आश्वासन दिया कि सिविल सर्जन से बात कर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
प्रश्न ये उठता है कि क्या सरकारी पदों पर बैठे लोग कानून और मर्यादाओं से ऊपर हो गए हैं? क्या स्वास्थ्य विभाग ऐसे कर्मचारियों की खुलेआम गुंडई को नजरअंदाज़ करेगा?
अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं — क्या गोपाल मालवीय पर कोई ठोस कार्रवाई होगी, या ये मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा? पत्रकारों ने साफ किया है कि वे इस तरह के व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करेंगे और जरूरत पड़ी तो एक जुट होकर बड़ा विरोध भी करेंगे।










