जयपुर, राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने परशुराम जयंती व अक्षय तृतीया पर प्रदेशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। देवनानी ने कहा है कि ‘सनातन जगत के आराध्य भगवान परशुराम ने योगी होते हुए भी शस्त्र उठाकर सत्य, समानता एवं सामाजिक न्याय की अवधारणा विकसित की। भगवान परशुराम की क्षमाशीलता, दानशीलता, सनातन मर्यादा, न्याय प्रियता, मातृ-पितृ भक्ति समस्त मानव समाज के लिए अनुकरणीय है।’
देवनानी ने कहा कि ‘समस्त सनातन जगत के आराध्य भगवान विष्णु जी के छठे अवतार भृगुकुल तिलक, अजर, अमर, अविनाशी, अष्ट चिरंजीवियों में सम्मिलित समस्त शस्त्र एवं शास्त्रों के ज्ञाता भगवान परशुराम का प्राकट्य वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया (अक्षय तृतीया) के दिन माता रेणुका के गर्भ से हुआ। भगवान परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि वेद-शास्त्रों के महान ज्ञाता थे। भृगुकुल में उत्पन्न भगवान परशुराम ने सदैव अपने गुरुजन तथा माता-पिता की आज्ञा का पालन किया। उनके कथनानुसार राजा का कर्तव्य वैदिक सतानत धर्म के अनुसार राजधर्म का पालन करते हुए प्रजा के हित में कार्य करना होता है, न कि प्रजा से आज्ञा पालन करवाना। भगवान परशुराम ने अश्वमेध महायज्ञ का आयोजन कर सप्तदीप युक्त पृथ्वी महर्षि कश्यप जी को दान कर दी थी। भगवान शिव द्वारा प्रदान अमोघ परशु (फरसे) से इनका नामकरण परशुराम हुआ।
देवनानी ने कहा कि अक्षय तृतीया पर्व पर अपने पारिवारिक और सामाजिक कार्यों का शुभारम्भ करें। समाज में जागरुकता लायें, ताकि लोग बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं से बच सकें। देवनानी ने कहा है कि बच्चों को पढाये, उन्हें सशक्त बनायें।










