रामायण थीम पर सजा वार्षिकोत्सव, बच्चों की प्रस्तुतियों ने मोहा मन

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जयपुर। राजधानी जयपुर के आगरा रोड स्थित बालाजी पैराडाइज़ गार्डन में रविवार को बचपन प्ले स्कूल पोल्ट्री फार्म, आगरा रोड, जयपुर एवं सनबीम इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल, आगरा रोड, जयपुर का संयुक्त वार्षिकोत्सव समारोह बड़े ही धूमधाम और सांस्कृतिक उल्लास के साथ आयोजित किया गया। इस वर्ष के वार्षिकोत्सव की विशेष थीम “रामायण” रखी गई, जिसने पूरे कार्यक्रम को आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण बना दिया।

कार्यक्रम स्थल को रामायण काल की झलक देने वाले भव्य मंच, आकर्षक साज-सज्जा और पारंपरिक प्रतीकों से सजाया गया था। जैसे ही समारोह की शुरुआत हुई, दर्शक दीर्घा में मौजूद अभिभावकों और अतिथियों को एक अलग ही सांस्कृतिक अनुभव प्राप्त हुआ।

नन्हे कलाकारों ने दी रामायण की जीवंत प्रस्तुति:

वार्षिकोत्सव के दौरान स्कूल के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने रामायण के विभिन्न प्रसंगों पर आधारित एक से बढ़कर एक मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं।
किसी ने श्रीराम के आदर्श चरित्र को मंच पर जीवंत किया, तो किसी ने माता सीता की मर्यादा, लक्ष्मण की भक्ति, हनुमान जी की वीरता और भरत के त्याग को भावपूर्ण अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया।

नन्हे बच्चों की वेशभूषा, आत्मविश्वास, संवाद अदायगी और भाव-भंगिमाएं देखकर अभिभावक भावविभोर हो उठे। रामायण पर आधारित नृत्य-नाटिकाओं और समूह नृत्य ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि बच्चों के माध्यम से संस्कार, नैतिकता और सामाजिक मूल्यों का सुंदर संदेश भी दिया।

धार्मिक के साथ जागरूकता का संदेश:

कार्यक्रम की खास बात यह रही कि प्रस्तुतियाँ केवल धार्मिक ही नहीं थीं, बल्कि उनमें सामाजिक और नैतिक जागरूकता का भी स्पष्ट संदेश निहित था।
बच्चों ने मंच से यह संदेश दिया कि सत्य, धर्म, कर्तव्य, सम्मान और सेवा जैसे मूल्य आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने रामायण काल में थे।

पर्यावरण संरक्षण, माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान, आपसी भाईचारा और समाज में सकारात्मक सोच को लेकर भी प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रभावी संदेश दिया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

प्राचार्य ने दी स्कूल की उपलब्धियों की जानकारी:

कार्यक्रम के दौरान स्कूल के प्राचार्य श्री योगेश ने मंच से उपस्थित अतिथियों, अभिभावकों और बच्चों को संबोधित किया। उन्होंने स्कूल की शैक्षणिक उपलब्धियों, शिक्षण पद्धति, सह-शैक्षणिक गतिविधियों और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की विस्तार से जानकारी दी।

प्राचार्य श्री योगेश ने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों को संस्कारवान, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनाना है। उन्होंने अभिभावकों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों की सफलता में स्कूल और माता-पिता दोनों की साझा भूमिका होती है।

अतिथियों का हुआ आत्मीय स्वागत-सत्कार:

समारोह में पधारे अतिथि मेहमानों का विद्यालय परिवार की ओर से पारंपरिक तरीके से स्वागत-सत्कार किया गया। पुष्पगुच्छ, स्मृति चिह्न और मधुर शब्दों के साथ अतिथियों का सम्मान किया गया, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ गई।

अतिथियों ने बच्चों की प्रस्तुतियों की जमकर सराहना की और कहा कि इतनी छोटी उम्र में बच्चों द्वारा रामायण जैसे महान ग्रंथ के मूल्यों को मंच पर प्रस्तुत करना वास्तव में सराहनीय प्रयास है।

उत्कृष्ट परिणाम लाने वाले बच्चों का सम्मान:

कार्यक्रम के दौरान एक विशेष सत्र में गत वर्ष उत्कृष्ट शैक्षणिक परिणाम लाने वाले विद्यार्थियों को मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। बच्चों को प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।

इस सम्मान समारोह से न केवल पुरस्कृत बच्चे उत्साहित हुए, बल्कि अन्य विद्यार्थियों को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरणा मिली।

अभिभावकों की रही उत्साहपूर्ण सहभागिता:

वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में बच्चों के माता-पिता और अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। अपने बच्चों को मंच पर परफॉर्म करते देख अभिभावकों का उत्साह देखते ही बन रहा था।
तालियों की गड़गड़ाहट और मुस्कुराते चेहरों ने पूरे माहौल को आनंदमय बना दिया।

अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों के आत्मविश्वास, मंचीय कौशल और संस्कारों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सांस्कृतिक रंगों से सजा यादगार आयोजन:

पूरा कार्यक्रम अनुशासन, समन्वय और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। बच्चों की प्रस्तुतियों, अतिथियों के उद्बोधन और सम्मान समारोह ने इस वार्षिकोत्सव को एक यादगार सांस्कृतिक आयोजन बना दिया।

कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय प्रबंधन ने सभी अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकों और बच्चों का आभार व्यक्त किया तथा भविष्य में भी इसी तरह के संस्कारयुक्त आयोजनों के आयोजन का संकल्प दोहराया।

कुल मिलाकर, रामायण थीम पर आधारित यह वार्षिकोत्सव न केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम रहा, बल्कि बच्चों के माध्यम से समाज को धर्म, संस्कार और जागरूकता का सशक्त संदेश देने वाला प्रेरणादायक आयोजन भी साबित हुआ।

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