चैत्र शुक्ल प्रतिपदा उत्सव पर निकला संघ का विशाल पथ संचलन

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जयपुर, 30 मार्च। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जयपुर महानगर के ऋषि गालव भाग की ओर से वर्ष प्रतिपदा उत्सव के अवसर पर विशाल पथ संचलन आयोजित किया गया। इस अवसर पर संघ के क्षेत्र प्रचारक निम्बाराम ने कहा कि संघ की प्रत्येक शाखा समाज की सज्जन शक्ति को साथ लेकर सर्वस्पर्शी व सर्वव्यापी बननी चाहिए। उन्होंने स्वयंसेवकों को प्रेरित करते हुए कहा कि प्रतिदिन शाखा में संस्कारों का अभ्यास कर उन्हें जीवन में आत्मसात करना ही संघ कार्य की प्रमुख विशेषता है।

निम्बाराम ने कहा कि वर्तमान में देशभर में 83,000 नियमित शाखाएँ संचालित हो रही हैं, जहाँ प्रतिदिन 8 लाख से अधिक स्वयंसेवक भारत माता की जयघोष के साथ नित्य प्रार्थना करते हैं। उन्होंने नव संवत्सर की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज में भारतीय नववर्ष के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, जो कि सकारात्मक बदलाव का संकेत है।

राजस्थान स्थापना दिवस का महत्व

निम्बाराम ने राजस्थान स्थापना दिवस पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विद्वानों के अनुसार, सरदार पटेल ने चैत शुक्ल प्रतिपदा, विक्रम संवत 2006 के दिन राजस्थान स्थापना दिवस की घोषणा की थी। उन्होंने राज्य के विकास के लिए समरसता और सौहार्द को आवश्यक बताया और शासन एवं समाज के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रतिनिधि सभा के संकल्पों का पालन आवश्यक

निम्बाराम ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रतिनिधि सभा में पारित संकल्प प्रत्येक स्वयंसेवक के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने शताब्दी वर्ष में शाखाओं को सर्वस्पर्शी बनाने के प्रयासों को गति देने की आवश्यकता बताई। समाज निर्माण की प्रक्रिया स्वयंसेवकों को स्वयं से शुरू करनी होगी और इसके लिए समाज को भी प्रेरित करना होगा।

संपूर्ण गणवेश में अनुशासनबद्ध संचलन

इस भव्य पथ संचलन में करीब 5,000 स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में अनुशासनबद्ध तरीके से कदमताल करते हुए शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरकर एकता एवं राष्ट्रभक्ति का परिचय दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जगद्गुरु आश्रम, जयपुर के महंत स्वामी अक्षयानंद थे। मंच पर राजस्थान क्षेत्र के संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल और ऋषि गालव भाग संघचालक अशोक जैन भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के आरंभ में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा द्वारा पारित प्रस्ताव ‘बांग्लादेश के हिन्दू समाज के साथ एकजुटता’ का वाचन किया गया। महंत स्वामी अक्षयानंद ने अपने उद्बोधन में संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार की दूरदर्शिता की सराहना की और संगठन की आवश्यकता पर बल दिया।

स्वागत एवं पुष्पवर्षा

स्वयंसेवकों के पथ संचलन के दौरान शहर के विभिन्न स्थानों पर सामाजिक संगठनों एवं स्थानीय नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। जयपुर की सड़कों पर हजारों स्वयंसेवकों को अनुशासनबद्ध तरीके से कदमताल करते देख देशभक्ति का अनूठा दृश्य देखने को मिला।

संघ के 6 प्रमुख उत्सवों में से एक – वर्ष प्रतिपदा उत्सव

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा मनाए जाने वाले छह प्रमुख उत्सवों में से एक, वर्ष प्रतिपदा का विशेष महत्व है। इस अवसर पर अनुशासित पथ संचलन निकाला गया, जिसमें हजारों स्वयंसेवकों ने सहभागिता की और एकता एवं अखंडता का संदेश दिया।

घोष वादन का आकर्षक प्रदर्शन

संघ के स्वयंसेवकों ने घोष वादन के माध्यम से अनुशासन और कला का अद्भुत प्रदर्शन किया। विभिन्न वाद्य यंत्रों, जैसे आनक (साइड ड्रम), त्रिभुज (ट्रायंगल), वंशी (बांसुरी), शंख (बिगुल) और प्रणव (बॉस ड्रम) के समन्वित वादन से वातावरण भक्तिमय और प्रेरणादायक बन गया।

पथ संचलन का मार्ग एवं जनसहभागिता

यह भव्य पथ संचलन महाराजा कॉलेज से प्रारंभ होकर अजमेरी गेट, छोटी चौपड़, त्रिपोलिया गेट, बड़ी चौपड़, सांगानेरी गेट और मोती डूंगरी रोड से गुजरते हुए रामनिवास बाग पहुंचा और पुनः महाराजा कॉलेज पर समाप्त हुआ। संचलन के दौरान हजारों नागरिक सड़कों के दोनों ओर खड़े होकर स्वयंसेवकों का अभिनंदन कर रहे थे।

संघ के इस अनुशासित और भव्य आयोजन ने राष्ट्रभक्ति एवं सामाजिक समरसता का संदेश दिया।

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