गौ माता बने राष्ट्र माता- अतुल गुप्ता

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जयपुर, अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद की ओर से 25 अप्रैल 2024 को गौशालाओं के स्वावलंबन, संवर्धन व संरक्षण हेतु राज्य की महत्वपूर्ण 150 गौशालयों ने 39 प्रस्तावों को पास कर भारत के प्रधानमंत्री से मांग की कि इन सभी प्रस्तावों पर कार्यवाही कर बजट में प्रावधान किया जाए और गौशालाओं को आर्थिक दृष्टि से मजबूत किया जाए |
मांग पत्र को डॉक्टर अतुल गुप्ता- अंतरराष्ट्रीय संयोजक अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद , राघवेंद्राचार्य जी – गलतापीठ युवाचार्य, डॉक्टर मेघेंद्र शर्मा – विज्ञान भारती संगठन सचिव, मुकेश भारद्वाज – संगठन सचिव, हरिओम शर्मा – गौ प्रचारक व कार्यालय सचिव अंकित आचार्य ने महामहिम को मांग पत्र सौंप कर समस्त विषयों से अवगत कराया तथा गौशालाओं को आ रही कठिनाइयों को भी बिंदुवार अंकित किया |
महामहिम राज्यपाल कलराज मिश्र ने पूरे मांग पत्र का गहराई से अवलोकन किया तथा यथा संभव प्रधानमंत्री तक मांग पत्र को अनुमोदन हेतु अग्रसेरित करने का आश्वासन दिया |


मांगपत्र में निम्न बिंदु अंकित किए गए :-
1. गौशालाओं के उत्पादित गोबर को विदेशों में निर्यात पर अनुसन्धान एवं विकास करने की मज़बूत नीति योजना हेतु आसान अनुसन्धान एवं विकास के कार्य हेतु बज़ट में प्रावधान किया जाये l
2. गौशालाओं में गोबर को विकसित देशों के साथ MOU करने के लिए एक कमेटी गठित हो, तथा गुणवत्ता युक्त गोबर से बेक्टेरिआ के निर्माण में चयनित गौशालाओं में वैज्ञानिक दृष्टि से लॅबोरेटरी स्थापित करने हेतु बजट निर्धारित किया जाये l
3. गौमूत्र मनुष्य एवं कृषि हेतु एक बहुमूल्य दवा है l गौमूत्र के कलेक्शन में सरलता लाने के लिए MNIT, IIT KANPUR, IIT MUMBAI, IIT DELHI, IIT VARANASI व अन्य IIT के साथ MOU करके गौमूत्र कलेक्शन गैजेट्स का निर्माण कराया जाये l उस हेतु बजट में उचित प्रावधान किया जाये l
4. राज्य में अधिकृत वित्त पोषित गौशालाओं की संख्या लगभग 3,500 है, जिनके पास कुल गौवंश लगभग 13,00,000 के आस पास है l उसका गोबर एक दिन में प्रति गाय से लगभग 10 किलोग्राम निकलता है, जो एक दिन में 1,30,00,000 कि० ग्रा० होता है l जो कि मासिक स्तर पर 3,90,00,000 कि० ग्रा० तथा वार्षिक सत्तर पर 47,45,,000 टन होता है l इस गोबर की मात्रा का यदि उच्च गुणवत्ता का खाद तैयार किया जाये तो इसको ₹ 10/- प्रति कि० ग्रा० की दर से बेचा जाये तो राज्य सरकार को 47,45,00,00,000 (रूपए 47अरब 45करोड़ मात्र) रूपए की राजस्व की प्राप्ति होगी l
5. राज्य सरकार वैज्ञानिक दृष्टि से नाइट्रोजन व फॉस्फोरस मुख्य घटक जो कि भूमि के लिए महत्वपूर्ण हैं, को तैयार कराये और उसके लिए अनुसन्धान एवं विकास का बज़ट सुनिश्चित करे, जिससे भूमि की उर्वरकता बढ़ेगी तथा किसान समृद्ध बनेगा जिससे राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में गौशालाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा l
6. सिंथेटिक फ़र्टिलाइज़र के स्थान पर गोबर से बनी खाद को 70 % अनुदान देकर किसानो को खाद क्रय विक्रय केंद्र के माध्यम से उपलब्ध कराई जाये l
7. गौ आधारित जैविक खाद के निर्माण व बिक्री हेतु IFCO, KRIBHCO, सहकारी विभाग तथा राज्य सरकार एजेंसियां माल तैयार होते ही उसकी बिक्री सुनिश्चित करें, तथा इसी क्रम में MSP निर्धारित की जाये जिससे गौशाला व गौपालक आर्थिक रूप से सुदृण बन सके l
8. गोकाष्ठ निर्माण में सिंथेटिक घटकों के बिना केलोफिट की प्रचुर मात्रा का ध्यान रखा जाये l
9. गौ काष्ठ सामान्य रूप से लकड़ी का विकल्प बन चुकी हैl गोकाष्ठ मशीन व गाय के गोबर के लिए शेड का प्रबंध क्षेत्रीय निकायों के द्वारा करवाने के लिए सरकार द्वारा उनको अधिकृत किया जाये, तथा दाह-संस्कार में गोकाष्ठ के प्रयोग का होना सुनिश्चित करें व इसका प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करेl
10. विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं भारत के स्वास्थ्य संगठन की तरफ से वर्ष 2022-23 के UNO के मेंडेट में संज्ञान में लाया गया कि पशु फ़ूड के ऊपर भारी संकट देखा जायेगा l जिसमें वर्ष 2023-24 में जो उत्पादन हुआ जैसे गेंहूँ की तूरी मात्र 30% ही फ़ूड का काम कर पायी जिसके लिए भारी चिंता जताई गयी l राज्य सरकार गौशालाओं के लिए ग्रीन फोडर, ड्राई फोडर, रियायती दरों पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था करें l
11. पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा से सूखा चारा लाया जा रहा है l 1,76,000 हेक्टेयर उपजाऊ भूमि होने के वावजूद पशुओं को चारा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है l अतः नेपियर ग्रास की खेती को व्यावसायिक स्तर पर ग्रीन फोडर की समस्या के समाधान हेतु NGO व वैज्ञानिक दृष्टिकोण से किसानों को खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाये, इस हेतु भी बज़ट में प्रावधान किया जाये l
12. गाय के गोबर की बिक्री का प्रबंध गौशालाओं के माध्यम से ही हो तथा जिसका प्रचार-प्रसार क्षेत्रीय निकायों के द्वारा करवाने के लिए सरकार द्वारा उनको अधिकृत किया जाये, व बिक्री केंद्र का व्योरा सम्बंधित वेब साईट पर उपलब्ध हो l
13. किसानों को आर्थिक दृस्टि से सुद्रण बनाने के लिए ग्रामीण परिपेक्ष्य में पर्यावरण हित व गौमाता के संरक्षण हेतु गोकाष्ठ का जन जाग्रति अभियान, विज्ञापन तथा छोटे -२ कम्पों द्वारा प्रशिक्षण देते हुए लघु उधोग को बढ़ावा दिया जाये l
14. गाय के गोबर से ईको-फ्रेंडली गमले तथा राखियों का निर्माण किया जाता है l इन उत्पादों को और अधिक सुन्दर बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल इस क्षेत्र में पूर्व में कार्य कर रही संस्थाओं के माध्यम से ही संचालित किया जाये l
15. स्वयं सहायता समूह व गौशालाओं हेतु इन के प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने व इसमें आवासीय सुविधा के साथ गाय के गोबर के दीपक, राखियां, गोकाष्ठ, तस्वीरें, कागज़, लाख व गोबर से बने चूड़े, सुन्दर-सुन्दर शुभ – लाभ, गणेश लक्ष्मी, मूर्ती, ईंट, खाद आदि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम, प्रशिक्षण विभाग द्वारा जिले वार केवल उन्ही संस्थानों के द्वारा दिया जाये जो इस क्षेत्र में पहले से कार्यरत व अनुभव रखते हों l
16. गाय के गोबर से बनने वाली बायो गैस के बड़े प्लांट क्लस्टर अनुसार बनाये जाएँ l जिसकी एक कंपनी बनाकर गोबर कलेक्शन तथा फंड मैनेजमेंट के माध्यम से कार्य कराया जाये तहत प्रशिक्षण भी उसी कंपनी दद्वारा की दिया जाये l इस बाबत बजट तथा भूमि आवंटन सरकार के द्वारा किया जाये l तदुपरांत यह कार्य भी अनुभवी संस्था द्वारा ही कराया जाये l
17. राजस्थान राज्य की रेतीली जमीन को पूर्ण उपजाऊ बनाने के क्रम के सरकार द्वारा जिलेवार भूमि का आवंटन निकाय द्वारा अनुभवी संस्था के माध्यम से गाय के गोबर व गौमूत्र के प्रभावशाली प्रयोग हेतु बजट, नलकूप, तारबंदी तथा अन्य आवश्यक सामग्रियों के लिए बजट आवंटन सम्बंधित प्रकोष्ठ के द्वारा किया जाये l
18. गौ उत्पादन की बिक्री के लिए गौ टेक तथा राष्ट्रीय पटल पर होने वाले एग्जीबिशन में गोपालन विभाग के द्वारा अलग से निःशुल्क स्टॉल उपलब्ध कराई जाए|
19. इंटरनेशनल ट्रेड फेयर जो की 14 नवंबर से 29 नवंबर तक हर साल होता है, उसमें अलग से गौशालाओं के लिए बिक्री केंद्र निःशुल्क उपलब्ध कराया जाए, इसका प्रावधान रखा जाए l
20. लाखों की तादात में गौ माताएं रोड पर अभी भी विचरण करती हैं, उनको और दुर्घटनाग्रस्त गौवंश को अनुकूल वाहन के द्वारा निकटतम गौशालाओं में पहुंचाने का प्रयास किया जाए, तथा उनके उपचार, रख रखाव, खाद्य सामग्री के लिए होने वाले व्यय के लिए एवं उसके लिए शेड आदि की व्यवस्था का बजट में प्रावधान किया जाए l
21. राज्य में अभी तक लगभग 3500 गौशालाओं में 13 लाख गौवंश है, तथा लगभग 1 करोड़ 37 लाख गौवंश गौशाला विहीन है l इसी क्रम में सरकार से अनुरोध है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में लगभग 50 लाख गौवंश को गौशालाओं में स्थापित करने हेतु आवश्यक आवश्यकताओं की पूर्ती के लिए प्रावधान करे l
22. गौ सेवा करने वाले गोपालकों का समस्त बीमारियों का 10 लाख रुपए का इंश्योरेंस निःशुल्क करने का प्रावधान सरकार द्वारा किया जाए l
23. गोपालक की आय सुनिश्चित की जाए, क्योंकि गौसेवा करने वाला व्यक्ति आर्थिक दृष्टि से बहुत कमजोर होता है, इसका भी प्रावधान बजट में किया जाए l
24. गौवंश के गौलोकवास के उपरांत उनके विधिवत अंतिम संस्कार हेतु बजट में समुचित प्रावधान किये जाएं l
25. गौशाला भूमि का गौशालाओं के नाम, नामांतरण प्रक्रिया सरल हो l इस उद्देध्य से गौचर भूमि के लिए केंद्र स्तर पर आयोग का गठन किया जाये l
26. गौवंश के संवर्धन, संरक्षण व अनुसन्धान के लिए गौ विश्वविद्यालय या अनुसन्धान एवं विकास संस्थान बनाया जाये l
27. गौशालाओं में शुद्ध पेयजल, तथा मुफ्त बिजली प्रदान की जाये l
28. गौशालाओं द्वारा निर्मित उत्पाद, पंचगव्य औषधियों पर GST मुफ्त रखा जाये l
29. आयकर की धारा 80 G के अंतर्गत दान राशि को (100 %) करमुक्त रखा जाये l
30. गौशालाओं को थेरेपी सेंटर के क्रम में विकसित करा जाये, तथा उसे वैज्ञानिक पद्दति से प्रमाणित किया जाये l
31. गौ अभ्यारण्य (संरक्षित क्षेत्र ) क्षेत्र राजस्थान में घोषित हो l
32. गौपालकों का वेतन / बीमा की व्यवस्था होनी चाहिए l
33. सुपर नेपियर बीज / अजोला की व्यवस्था होनी चाहिए l
34. गौशालाओं को जमीन की व्यवस्था जिनमे सुपर नेपियर ग्रास व अजोला की व्यवस्था हेतु संवर्धन कार्य हेतु व्यवस्था की जाये|
35. नरेगा में गौशालाओं को कार्य कराने से जोड़ा जाये, जिसमे गौशालाओं को मानव श्रम मिल सके l
36. आदर्श गौशाला (सालासर बालाजी) के अनुसरण में आकार गौशलों का संवर्धन करे l
37. गौशालाओं में महिलाओं का स्थान कार्यकारिणी में होना चाहिए l
38. पंचगव्य चिकित्सा के द्वारा बहुत से रोगों में लाभ हो रहा है, अतः सरकार से निवेदन है कि पंचगव्य औषधिओं का पुनर्भरण किया जाये l
39. गाय की महिमा पाठ्यपुस्तकों में पढ़ाना चाहिए l

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