शिकायत के बावजूद नहीं हुई मरम्मत, सतना कलेक्ट्रेट के NIC कक्ष की छत ढही

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शिकायत के बावजूद नहीं हुई मरम्मत, सतना कलेक्ट्रेट के NIC कक्ष की छत ढही

सिस्टम क्षतिग्रस्त, इंटरनेट और VC नेटवर्क पर मंडराया खतरा; कलेक्ट्रेट की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

सतना। जिला कलेक्ट्रेट परिसर में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब NIC कक्ष की छत का प्लास्टर अचानक भरभराकर नीचे गिर पड़ा। हादसे में वहां रखे सिस्टम और अन्य उपकरण क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आई है। गनीमत रही कि घटना के समय कोई व्यक्ति इसकी चपेट में नहीं आया, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।

सबसे गंभीर बात यह सामने आ रही है कि छत की खराब स्थिति को लेकर नाजिर शाखा को पहले ही शिकायत किए जाने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि शिकायत मिलने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों ने इस ओर ध्यान क्यों नहीं दिया?

बाल-बाल बचा महत्वपूर्ण नेटवर्क

NIC कक्ष जिला प्रशासन की डिजिटल व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां इंटरनेट कनेक्टिविटी और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) नेटवर्क से जुड़ी व्यवस्थाएं संचालित होती हैं। यदि छत का मलबा नेटवर्क की महत्वपूर्ण लाइनों पर गिरकर उन्हें क्षतिग्रस्त कर देता, तो जिले की प्रशासनिक डिजिटल कनेक्टिविटी प्रभावित होने की आशंका थी।

प्रदेश स्तर पर होने वाली वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, ऑनलाइन प्रशासनिक कार्यों और विभिन्न डिजिटल सेवाओं के संचालन में भी इसका असर पड़ सकता था। इस लिहाज से यह घटना महज प्लास्टर गिरने की घटना नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण प्रशासनिक infrastructure की सुरक्षा और रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

शिकायत के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?

घटना के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब भवन की छत की स्थिति पहले से खराब थी और इसकी जानकारी जिम्मेदार शाखा तक पहुंच चुकी थी, तो फिर मरम्मत क्यों नहीं कराई गई?

क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा था? क्या भवन के नियमित निरीक्षण की व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित है? और यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

भ्रष्टाचार की आशंका या महज लापरवाही?

कलेक्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण सरकारी भवन में रखरखाव की स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों ने व्यवस्था में संभावित अनियमितता और भ्रष्टाचार की आशंका को भी चर्चा में ला दिया है। हालांकि इसकी वास्तविकता सामने लाने के लिए संबंधित निर्माण एवं रखरखाव कार्यों, पूर्व शिकायतों, स्वीकृत बजट और किए गए खर्च की जांच आवश्यक होगी।

यदि भवन की मरम्मत या रखरखाव के लिए पूर्व में राशि स्वीकृत हुई है, कार्य कराया गया है अथवा कागजों में मरम्मत पूरी दिखाई गई है, तो पूरे मामले की जांच से तस्वीर साफ हो सकती है।

अब जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग

घटना के बाद जरूरी है कि प्रशासन NIC कक्ष सहित कलेक्ट्रेट भवन के अन्य हिस्सों का तकनीकी निरीक्षण कराए और जर्जर हिस्सों की तत्काल मरम्मत सुनिश्चित करे। साथ ही पूर्व में की गई शिकायतों और उनके निस्तारण की भी जांच होनी चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है—जब शिकायत पहले ही की जा चुकी थी, तो हादसा होने से पहले जिम्मेदार क्यों नहीं जागे?

सतना कलेक्ट्रेट की यह घटना प्रशासनिक भवनों के रखरखाव की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन मामले को महज हादसा मानकर आगे बढ़ता है या जिम्मेदारी तय कर लापरवाही के पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराता है।

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