सतना के बाद सिंगरौली में नगर निगम कमिश्नर सविता प्रधान और मेयर रानी अग्रवाल में अनबन बढ़ गई, महापौर पति से परेशान कमिश्नर।
परिषद की मीटिंग में दोनों के बीच तीखी नोकझोंक हुई है। बैठक में कमिश्नर सविता प्रधान ने कहा कि महापौर निर्णय लेने में सक्षम नहीं हैं, जिसके कारण फाइलें आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। कई बार ऐसा होता है कि फाइलें निगम कार्यालय में न रहकर बाहर चली जाती हैं। इससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है। यही नहीं, कमिश्नर ने यह भी कह दिया कि संविधान ने महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिया है तो उन्हें निर्णय लेने की जिम्मेदारी उठानी चाहिए। कमिश्नर जब बोल रही थीं तो मेयर रानी अग्रवाल खड़ी हो गईं और कहने लगीं कि फाइलें तीन दिनों तक अपने पास रखना उनका अधिकार है। उन्होंने कहा कि डी-1 बंगला उनका घर नहीं बल्कि ऑफिस है। फाइलें ले जाकर पढ़ना और समझा उनका विशेषाधिकार है। मेयर ने कहा कि बिना पढ़े और समझे किसी भी फाइनल पर हस्ताक्षर करना मेरा लिए संभव नहीं है। वहीं, मीडिया से बात करते हुए नगर निगम कमिश्नर सविता प्रधान ने कहा कि हमारा उद्देश्य किसी को नीचा दिखाना नहीं था। महिलाओं को जो अधिकारी मिले हैं, उसका सही उपयोग होना चाहिए। मुझे पार्षद पति और महापौर पति जैसे शब्द सुनकर दुख होता है। यह सोच बदलनी चाहिए।












