जयपुर। महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम राजस्थान के मार्गदर्शन में प्रदेश में साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट ने एक नया और गंभीर ट्रेंड सामने लाया है, जो आम नागरिकों के लिए बेहद चिंताजनक है। डीआईजी साइबर क्राइम विकास शर्मा ने बताया कि हालिया विश्लेषण में यह सामने आया है कि साइबर ठग अब मेट्रिमोनियल और डेटिंग प्लेटफॉर्म्स को बड़े पैमाने पर अपने अपराध का माध्यम बना रहे हैं।
जांच में सामने आया है कि जालसाज Jeevansaathi.com और Shaadi.com जैसे Matrimonial Platforms के साथ-साथ Tinder, Bumble और Cupid जैसे Dating Apps का दुरुपयोग कर रहे हैं। इन प्लेटफॉर्म्स पर शादी या रिश्ते की तलाश कर रहे लोगों को भावनात्मक रूप से फंसाकर उनकी मेहनत की कमाई को निवेश के नाम पर ठगा जा रहा है। साइबर अपराधी पहले भरोसे का माहौल बनाते हैं और फिर धीरे-धीरे पीड़ित को आर्थिक नुकसान की ओर धकेलते हैं।
साइबर ठग बेहद शातिर तरीके से काम करते हैं। वे आकर्षक फोटो और फर्जी पहचान के साथ असली जैसी दिखने वाली नकली प्रोफाइल तैयार करते हैं। संपर्क होने के बाद ये अपराधी हफ्तों तक वीडियो कॉल और व्हाट्सएप के माध्यम से बातचीत कर पीड़ित का भरोसा जीतते हैं। कई मामलों में ये खुद को विदेश या बड़े कॉर्पोरेट ऑफिस में कार्यरत दिखाने के लिए नकली बैकग्राउंड का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनकी प्रोफाइल और अधिक विश्वसनीय लगे।
जब पीड़ित पूरी तरह भावनात्मक रूप से जुड़ जाता है, तब अपराधी क्रिप्टोकरेंसी या हाई-रिटर्न इन्वेस्टमेंट स्कीम में पैसा लगाने का दबाव बनाते हैं। भावनात्मक ब्लैकमेल और झूठे वादों के जरिए पीड़ित को लगातार रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे कुछ ही समय में लाखों रुपये की ठगी हो जाती है।
इस तरह की धोखाधड़ी से बचाव के लिए राजस्थान पुलिस ने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने सलाह दी है कि किसी भी ऑनलाइन प्रोफाइल पर तुरंत भरोसा न करें और उसकी फोटो की सच्चाई जांचने के लिए Google Reverse Image Search का उपयोग करें। आमने-सामने मुलाकात से पहले किसी भी व्यक्ति के साथ बैंक डिटेल्स, निजी जानकारी या व्यक्तिगत फोटो साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति कम समय में असामान्य और अवास्तविक रिटर्न का दावा करता है, तो उसे धोखाधड़ी का संकेत मानें।
पुलिस ने यह भी कहा है कि बैंकों द्वारा समय-समय पर भेजे जाने वाले साइबर जागरूकता संदेशों को गंभीरता से पढ़ें और उनका पालन करें। सतर्कता ही इस तरह के अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो उसे घबराने के बजाय तुरंत पुलिस को सूचना देनी चाहिए। इसके लिए सरकार द्वारा जारी साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल किया जा सकता है। इसके अलावा पीड़ित https://cybercrime.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। राजस्थान पुलिस ने विशेष सहायता के लिए 9256001930 और 9257510100 हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं, जहां साइबर हेल्पडेस्क के माध्यम से त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जाती है। समय पर दी गई सूचना ही ऐसे साइबर अपराधियों को पकड़ने में सबसे अहम भूमिका निभाती है।










