नई दिल्ली | विशेष संवाददाता (उजला दर्पण)
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बढ़ते तनाव के बीच पुरुषों के स्वास्थ्य को लेकर अक्सर कई अध्ययन सामने आते रहते हैं। लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया और स्वास्थ्य जगत में एक रिपोर्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया गया है कि पुरुषों की लंबी उम्र और उनके यौन स्वास्थ्य के बीच एक सीधा संबंध है।
अध्ययन का दायरा और वैज्ञानिक आधार
यह रिसर्च किसी छोटे समूह पर नहीं, बल्कि 32,000 से अधिक वयस्कों के विस्तृत डेटा पर आधारित है। अध्ययन में 18 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों की जीवनशैली और उनकी मृत्यु दर के बीच के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट के चौंकाने वाले निष्कर्ष बताते हैं कि जो पुरुष अपने जीवन में शारीरिक रूप से सक्रिय (सप्ताह में कम से कम एक बार) रहते हैं, उनमें समय से पूर्व मृत्यु की संभावना उन लोगों के मुकाबले 50% तक कम हो जाती है, जो पूरी तरह निष्क्रिय जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
सेहत को मिलने वाले 5 बड़े फायदे
शोधकर्ताओं ने इस रिपोर्ट में केवल मृत्यु दर ही नहीं, बल्कि शरीर पर पड़ने वाले अन्य सकारात्मक प्रभावों का भी उल्लेख किया है:
- प्रोस्टेट कैंसर का कम खतरा: अध्ययन में यह बात प्रमुखता से उभरी है कि नियमित अंतराल पर शारीरिक सक्रियता से पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि स्वस्थ रहती है, जिससे भविष्य में कैंसर होने का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।
- हृदय रोगों से सुरक्षा: डॉक्टरों का मानना है कि यौन गतिविधि एक तरह का कार्डियोवैस्कुलर व्यायाम है। यह रक्तचाप (Blood Pressure) को नियंत्रित रखने और दिल की धमनियों को लचीला बनाने में सहायक होती है।
- इम्युनिटी और हार्मोनल बैलेंस: सक्रिय जीवनशैली शरीर में ‘एंडोर्फिन’ और ‘ऑक्सीटोसिन’ जैसे हार्मोन्स को रिलीज करती है, जो न केवल मूड को अच्छा रखते हैं बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं।
- बेहतर नींद और तनाव मुक्ति: आज के समय में ‘कोर्टिसोल’ (तनाव हार्मोन) पुरुषों में बीमारियों का सबसे बड़ा कारण है। शारीरिक संतुष्टि इस हार्मोन के स्तर को कम कर मानसिक शांति प्रदान करती है।
- दीर्घायु (Longevity): आंकड़ों के मुताबिक, खुशहाल वैवाहिक और सक्रिय जीवन जीने वाले पुरुष मानसिक रूप से अधिक मजबूत पाए गए हैं, जिसका सीधा असर उनकी कुल उम्र पर पड़ता है।
सामाजिक वर्जनाएं और स्वास्थ्य
भारत जैसे समाज में अक्सर यौन स्वास्थ्य (Sexual Health) पर बात करना एक ‘टैबू’ या शर्म का विषय माना जाता है। उजाला दर्पण से बातचीत में विशेषज्ञों ने बताया कि जानकारी के अभाव में कई पुरुष अपनी समस्याओं को छुपाते हैं, जो बाद में गंभीर अवसाद या शारीरिक कमजोरी का कारण बनती हैं। इस रिपोर्ट का उद्देश्य डराना नहीं, बल्कि पुरुषों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है।
क्या कहते हैं डॉक्टर?
हालाँकि यह रिपोर्ट एक सकारात्मक दिशा दिखाती है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इसे केवल एक ही नजरिए से नहीं देखना चाहिए।वरिष्ठ फिजिशियन के अनुसार, “शारीरिक सक्रियता निश्चित रूप से फायदेमंद है, लेकिन इसके साथ संतुलित आहार, धूम्रपान से दूरी और पर्याप्त नींद भी उतनी ही जरूरी है।”
1. विशेषज्ञों का तर्क: क्यों है यह ‘नेचुरल स्ट्रेस बस्टर’?
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, पुरुषों में काम के दबाव और सामाजिक अपेक्षाओं के कारण तनाव का स्तर अधिक होता है। नियमित शारीरिक सक्रियता शरीर में डोपामाइन और सेरोटोनिन के स्तर को बढ़ाती है, जिन्हें ‘हैप्पी हार्मोन्स’ कहा जाता है। यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि जो पुरुष मानसिक रूप से शांत और शारीरिक रूप से संतुष्ट रहते हैं, उनके अंगों की कार्यक्षमता दूसरों की तुलना में 30% अधिक होती है।
2. क्या कहते हैं सांख्यिकीय आंकड़े?
इस शोध में शामिल 32,000 लोगों के डेटा का विश्लेषण करने पर यह पाया गया कि:
45 से 60 वर्ष की आयु के पुरुषों में दिल के दौरे का खतरा उन लोगों में कम था जो सप्ताह में कम से कम दो बार सक्रिय थे।
नियमित सक्रियता से शरीर में Immune System (IgA) का स्तर बढ़ता है, जो आम सर्दी-जुकाम और संक्रमण से लड़ने में मदद करता है।
अध्ययन का निचोड़ यह है कि एक स्वस्थ और लंबी जिंदगी के लिए शरीर का हर अंग और हर प्राकृतिक क्रिया का सुचारू रूप से चलना अनिवार्य है। यदि आप अपनी जीवनशैली में संतुलन बना कर रखते हैं, तो आप न केवल बीमारियों से दूर रहेंगे बल्कि एक ऊर्जावान जीवन का आनंद भी ले सकेंगे।
उजला दर्पण की सलाह: किसी भी तरह की शारीरिक समस्या या बदलाव महसूस होने पर नीम-हकीमों के चक्कर में पड़ने के बजाय प्रमाणित डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह लें।









