जयपुर। गुलाबी नगरी के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में शुमार संजय टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, लालकोठी ने एक बार फिर अपनी गौरवशाली परंपरा को दोहराते हुए युवा सप्ताह “उत्कर्ष-2026” का अत्यंत भव्य और गरिमामय शुभारंभ किया है। 09 जनवरी 2026 की सुबह कॉलेज परिसर में एक नई ऊर्जा और उत्साह के साथ हुई, जहाँ ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के महान भारतीय आदर्शों की गूँज सुनाई दी। यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों के कौशल को निखारने का एक मंच है, बल्कि यह संस्थान की उस दूरगामी सोच का भी परिचायक है जो भावी शिक्षकों के निर्माण में विश्वास रखती है।

सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर हुआ परिसर:
कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन भारतीय संस्कृति की मर्यादा के अनुरूप ‘दीप प्रज्ज्वलन’ के साथ किया गया। जैसे ही मंत्रोच्चार के बीच दीप की लौ प्रज्वलित हुई, पूरा महाविद्यालय परिसर सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणादायक वातावरण से भर उठा। कॉलेज के अनुशासन और वहां की व्यवस्था को देखकर यह स्पष्ट था कि संजय टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज केवल डिग्री देने वाला संस्थान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व को गढ़ने वाली एक पाठशाला है। यहाँ का कोना-कोना आज युवाओं के आत्मविश्वास और भविष्य के सपनों से चमक रहा था।
मुख्य अतिथि डॉ. अरुणा चौहान का प्रेरक संबोधन:
उद्घाटन सत्र की गरिमा को बढ़ाते हुए मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. अरुणा चौहान (सीनेट सदस्य, राजस्थान विश्वविद्यालय एवं प्राचार्य, मीरा गर्ल्स कॉलेज) उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने ओजस्वी संबोधन में कॉलेज की शैक्षणिक कार्यप्रणाली की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। डॉ. चौहान ने कहा कि “युवा शक्ति ही राष्ट्र निर्माण की सबसे सशक्त आधारशिला है।” उन्होंने स्वामी विवेकानंद के कालजयी संदेश—”उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाये”—को उद्धृत करते हुए विद्यार्थियों के भीतर सोई हुई ऊर्जा को जगाने का प्रयास किया। उनका व्यक्तित्व विकास पर दिया गया व्याख्यान छात्रों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं था, जिसमें उन्होंने निरंतर आगे बढ़ने के लिए अनुशासन और सकारात्मक सोच को अनिवार्य बताया।
प्राचार्य प्रो. सुनीता भार्गव – एक कुशल मार्गदर्शक का विज़न:
महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. सुनीता भार्गव ने अपने स्वागत उद्बोधन में संस्थान के विज़न को साझा किया। उन्होंने न केवल नवागंतुक अतिथियों का सत्कार किया, बल्कि विद्यार्थियों को यह समझाया कि आज के युग में केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। उन्होंने शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ सह-पाठ्यचर्या और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता पर बल दिया। प्रो. भार्गव का मानना है कि युवाओं का सर्वांगीण विकास ही एक सशक्त समाज की रचना कर सकता है। उनके नेतृत्व में कॉलेज निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है, जहाँ हर छात्र को अपनी प्रतिभा दिखाने का समान अवसर प्राप्त होता है।
’युवा संवाद’ – विचारों का आदान-प्रदान और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य:
”उत्कर्ष-2026″ के पहले दिन का सबसे आकर्षक पहलू ‘युवा संवाद’ रहा, जिसका शीर्षक था—”आज का युवा और राष्ट्र निर्माण”। इस सत्र ने यह साबित कर दिया कि संजय टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज के प्रशिक्षार्थी केवल शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर भी गहरी समझ रखते हैं। चर्चा के दौरान यह निष्कर्ष निकला कि “सशक्त युवा ही सशक्त भारत की नींव रखता है।” छात्रों ने बड़े उत्साह के साथ अपने विचार रखे और यह संकल्प लिया कि वे अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्वों को भी पूरी निष्ठा से निभाएंगे। यह संवाद सत्र बौद्धिक विमर्श का एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश कर गया।
कुशल प्रबंधन और कॉलेज की गौरवशाली छवि:
इतने बड़े आयोजन को सुव्यवस्थित रूप से धरातल पर उतारने का श्रेय कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. रीटा झाझड़िया को जाता है। उनके कुशल निर्देशन और सूक्ष्म नियोजन की वजह से कार्यक्रम का हर हिस्सा बेहद प्रभावशाली रहा। कॉलेज के शिक्षण स्टाफ और प्रबंधन समिति के बीच का आपसी सामंजस्य यह दर्शाता है कि यहाँ टीम वर्क को सर्वोपरि रखा जाता है। संजय टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, लालकोठी ने इस आयोजन के माध्यम से अपनी उस छवि को और भी पुख्ता किया है, जहाँ शिक्षा को एक मिशन के रूप में लिया जाता है।
भावी शिक्षकों के लिए एक मील का पत्थर:
”उत्कर्ष-2026″ केवल सात दिनों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह उन भावी शिक्षकों के लिए एक प्रशिक्षण शिविर है जो कल देश के भविष्य को संवारेंगे। कॉलेज द्वारा आयोजित यह युवा सप्ताह विद्यार्थियों के भीतर नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और रचनात्मकता को विकसित करने का एक सुनहरा अवसर है। जिस तरह से इस कार्यक्रम का आगाज़ हुआ है, उसे देखकर यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि आने वाले दिनों में यहाँ प्रतिभाओं का अनूठा प्रदर्शन देखने को मिलेगा।
एक अनुकरणीय पहल:
आज के दौर में जहाँ शिक्षा केवल व्यावसायिक होती जा रही है, वहीं संजय टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज जैसे संस्थान अपनी गौरवशाली परंपराओं को जीवित रखे हुए हैं। “उत्कर्ष-2026” का यह शानदार आगाज़ यह संदेश देता है कि जब इरादे नेक हों और नेतृत्व कुशल हो, तो सफलता कदम चूमती है। पूरा जयपुर आज इस कॉलेज की इस अनूठी पहल की सराहना कर रहा है। यहाँ के विद्यार्थियों के चेहरों पर जो आत्मविश्वास दिखा, वह इस बात का गवाह है कि यह संस्थान राजस्थान के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालयों में से एक क्यों है।










