पॉक्सो मामलों में ऐतिहासिक बदलाव: पहली बार दर्ज मामलों से अधिक का हुआ निपटारा, निपटान दर 109 प्रतिशत पर पहुंची

---Advertisement---

नई दिल्ली। भारत ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों में न्यायिक मोर्चे पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। पहली बार ऐसा हुआ है जब एक वर्ष में प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दर्ज होने वाले मामलों से अधिक मामलों का निपटारा किया गया है। इससे वर्षों से लंबित मामलों के बोझ से जूझ रही न्यायिक व्यवस्था में एक निर्णायक मोड़ देखा जा रहा है। एक हालिया अध्ययन के अनुसार वर्ष 2025 में देशभर में पॉक्सो के 80,320 नए मामले दर्ज हुए, जबकि 87,754 मामलों का निपटारा किया गया। इसके साथ ही निपटान दर बढ़कर 109 प्रतिशत पर पहुंच गई है।

यह निष्कर्ष सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहेवियर चेंज फॉर चिल्ड्रेन (सी-लैब) द्वारा तैयार रिपोर्ट “पेंडेंसी टू प्रोटेक्शन: अचीविंग द टिपिंग पॉइंट टू जस्टिस फॉर चाइल्ड विक्टिम्स ऑफ सेक्सुअल एब्यूज” में सामने आए हैं। यह अध्ययन इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन की पहल पर किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह बदलाव इस बात का संकेत है कि भारतीय न्यायिक प्रणाली अब केवल लंबित मामलों का प्रबंधन नहीं कर रही, बल्कि उन्हें सक्रिय रूप से कम करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

24 राज्यों में निपटान दर 100 प्रतिशत से अधिक

रिपोर्ट के अनुसार देश के 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पॉक्सो मामलों की निपटान दर 100 प्रतिशत से अधिक रही है। इनमें से सात राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में यह दर 150 प्रतिशत से अधिक, जबकि अन्य सात राज्यों में 121 से 150 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई। इसके अलावा 10 राज्यों ने 100 से 120 प्रतिशत की निपटान दर हासिल की। इन राज्यों ने न केवल वर्ष 2025 में दर्ज मामलों का निपटारा किया, बल्कि पिछले वर्षों से लंबित मामलों को भी बड़ी संख्या में समाप्त किया है।

लंबित मामलों की चुनौती अभी बरकरार

हालांकि रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। वर्ष 2023 तक देश में 2,62,089 पॉक्सो मामले लंबित थे, जिनमें से लगभग आधे मामले दो वर्ष से अधिक समय से अदालतों में लंबित हैं। खासतौर पर पांच वर्ष से अधिक पुराने लंबित मामलों में तीन राज्यों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। इनमें उत्तर प्रदेश 37 प्रतिशत, महाराष्ट्र 24 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल 11 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर हैं। कुल मिलाकर पांच साल से अधिक समय से लंबित मामलों का लगभग तीन-चौथाई बोझ इन्हीं तीन राज्यों पर है।

600 अतिरिक्त ई-पॉक्सो अदालतों की जरूरत

रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि यदि सभी लंबित पॉक्सो मामलों को चार वर्षों के भीतर पूरी तरह समाप्त करना है, तो देशभर में 600 अतिरिक्त ई-पॉक्सो अदालतों की स्थापना आवश्यक होगी। इसके लिए लगभग 1,977 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान की जरूरत बताई गई है, जिसमें निर्भया फंड का उपयोग किया जा सकता है। रिपोर्ट का कहना है कि तकनीक आधारित ई-अदालतें मामलों की सुनवाई को तेज करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

न्याय में देरी, बच्चों के आघात को बढ़ाती है

इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन के निदेशक (शोध) पुरुजीत प्रहराज ने कहा कि भारत आज बाल यौन शोषण के खिलाफ अपने संघर्ष में एक बेहद संवेदनशील और निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि जब न्यायिक व्यवस्था दर्ज होने वाले मामलों से अधिक मामलों का निपटारा करती है, तो यह सिर्फ आंकड़ों की उपलब्धि नहीं, बल्कि बच्चों और समाज का न्याय व्यवस्था पर भरोसा लौटने का संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि न्याय में हर दिन की देरी बच्चे के मानसिक आघात को और गहरा करती है, इसलिए इस गति को बनाए रखना नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है।

तकनीक और निगरानी पर जोर

रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को हर साल 100 प्रतिशत से अधिक निपटान दर बनाए रखने का लक्ष्य रखना चाहिए। साथ ही जिन राज्यों में न्यायिक प्रक्रिया धीमी है, उन्हें तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग दिया जाना चाहिए। दोषसिद्धि और बरी होने की दरों की नियमित निगरानी, एआई आधारित कानूनी शोध उपकरणों और आधुनिक दस्तावेज प्रबंधन प्रणालियों के उपयोग से न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक तेज व प्रभावी बनाया जा सकता है।

यह रिपोर्ट 2 दिसंबर 2025 तक उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है, जो नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (एनजेडीजी), नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) और लोकसभा में पूछे गए सवालों के आधिकारिक उत्तरों से संकलित किए गए हैं। यह उपलब्धि जहां न्यायिक प्रणाली के लिए एक सकारात्मक संकेत है, वहीं बच्चों के अधिकारों और संवेदनशील न्याय की दिशा में एक मजबूत उम्मीद भी जगाती है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment