राज्यसभा में बोले शेखावत: “भारत का घरेलू पर्यटन बेजोड़, दुनिया की तुलना में कहीं मजबूत रिकवरी”

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नई दिल्ली, 4 दिसंबर। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने राज्यसभा में कहा कि भारत का घरेलू पर्यटन मॉडल इतना व्यापक और प्रभावी है कि उसकी तुलना किसी भी देश से नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को लेकर चर्चा ठीक है, लेकिन पूरे सेक्टर का मूल्यांकन केवल उसी दृष्टिकोण से करना उचित नहीं होगा, क्योंकि भारत में घरेलू यात्रियों की संख्या दुनिया के कई देशों की कुल जनसंख्या से भी अधिक है।

शेखावत ने उदाहरण देते हुए कहा कि थाईलैंड में चार करोड़ पर्यटक पहुंचे होंगे, लेकिन अकेले अयोध्या में हाल के महीनों में आठ करोड़ श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। उन्होंने याद दिलाते हुए कहा कि पिछले कुंभ मेले में लगभग 66 करोड़ लोगों ने स्नान किया था, जो किसी भी देश के वार्षिक पर्यटन ट्रैफिक से कहीं कई गुना बड़ा आंकड़ा है। उनके अनुसार, ऐसे उदाहरण यह साबित करते हैं कि यदि पर्यटन क्षेत्र को केवल विदेशी पर्यटकों की संख्या से मापा जाए, तो यह वास्तविक तस्वीर को सही रूप में प्रस्तुत नहीं करेगा।

रोजगार पर कांग्रेस सांसद के सवाल का जवाब—“दिए गए आंकड़ों का स्रोत स्पष्ट नहीं”

प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी द्वारा पर्यटन क्षेत्र में रोजगार घटने और प्रचार बजट कम होने से जुड़े प्रश्नों के उत्तर में शेखावत ने कहा कि सदस्य द्वारा बताए गए रोजगार डेटा का स्पष्ट स्रोत नहीं बताया गया। उन्होंने कहा कि पर्यटन एक अत्यंत विकेन्द्रित सेक्टर है, जिसमें होटल, एयरलाइंस, ट्रैवल एजेंसियां, परिवहन, होमस्टे, धार्मिक आयोजन, हस्तशिल्प, स्ट्रीट फूड और स्थानीय बाजार जैसी असंख्य इकाइयाँ शामिल हैं। ऐसे में किसी भी संख्या को संदर्भ से बाहर रखकर प्रस्तुत करना स्थिति को गलत तरीके से दर्शाता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि कोविड महामारी के दौरान पर्यटन क्षेत्र को भारी चोट पहुँची थी, लेकिन भारत ने दुनिया के अधिकांश देशों से तेज गति से रिकवरी हासिल की। “भारत आज लगभग 2019 के प्री-कोविड स्तर को छू चुका है, जबकि कई विकसित देश अब भी महामारी से पहले की स्थिति तक पहुँच पाने के लिए जूझ रहे हैं,” उन्होंने कहा।

एक वर्ष में दो करोड़ विदेशी पर्यटक, 2 लाख करोड़ से अधिक की कमाई

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पिछले एक वर्ष में देश में दो करोड़ से अधिक विदेशी सैलानी आए, जिससे लगभग दो लाख तीन हजार करोड़ रुपये (लगभग 33 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का विदेशी मुद्रा राजस्व प्राप्त हुआ। उन्होंने इसे भारत के पर्यटन क्षेत्र की मजबूती का बड़ा संकेत बताया और कहा कि “यदि विदेशी पर्यटक इतने बड़े पैमाने पर लौट रहे हैं, तो यह भारत की वैश्विक ब्रांडिंग और सुरक्षा–सुविधाओं में बढ़ते विश्वास का परिणाम है।”

शेखावत ने कहा कि भारत का पर्यटन केवल ‘इंटरनेशनल फुटफॉल’ पर निर्भर नहीं है। “हमारा मॉडल घरेलू यात्रियों पर आधारित है और उसकी ताकत दुनिया में कहीं नहीं मिलती,” उन्होंने कहा।

बजट में कटौती नहीं, प्रचार रणनीति का आधुनिकीकरण—शेखावत

बजट कटौती के प्रश्न पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह कमी दरअसल प्रचार के तरीकों में बदलाव की वजह से हुई है। अब पर्यटन मंत्रालय पारंपरिक विज्ञापन मॉडल पर कम खर्च करते हुए डिजिटल टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर्स के माध्यम से अत्यधिक प्रभावी प्रचार कर रहा है।

उन्होंने कहा, “जी-20 के दौरान भारत की वैश्विक पहचान मजबूत हुई। इसके बाद डिजिटल प्रचार बेहद कम लागत में अधिक उपयोगी साबित हुआ है। बजट में कमी इसका संकेत नहीं कि प्रचार कम हुआ है—बल्कि यह संसाधनों के ज्यादा स्मार्ट और लक्ष्योन्मुख उपयोग का उदाहरण है।”

राज्यों के योगदान पर जोर—“पर्यटन केवल होटलों तक सीमित नहीं”

तमिलनाडु और तेलंगाना से जुड़े प्रश्नों के उत्तर में शेखावत ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विविधता उसकी सबसे बड़ी शक्ति है और केंद्र सरकार चाहती है कि प्रत्येक राज्य अपनी अनूठी विरासत के आधार पर पर्यटन को आर्थिक वृद्धि का इंजन बनाए।

उन्होंने कहा कि पर्यटन को सीमित दायरे में समझना गलत है। यह केवल होटलों या एयरलाइंस तक नहीं, बल्कि होमस्टे, परिवहन, लोककला, हस्तशिल्प, खानपान, धार्मिक आयोजनों, ट्रैवल सर्विस, स्थानीय बाजार और हजारों परोक्ष गतिविधियों से जुड़ा है। इसके माध्यम से व्यापक पैमाने पर रोजगार उत्पन्न होता है।

“2047 तक पर्यटन का लक्ष्य—GDP में 10% योगदान और 10 करोड़ रोजगार”

शेखावत ने बताया कि केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2047 तक पर्यटन क्षेत्र भारत की GDP में कम से कम 10 प्रतिशत योगदान दे। इसी अवधि में पर्यटन सेक्टर के माध्यम से 10 करोड़ से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि भारत “विजिट इंडिया” से “एक्सपीरियंस इंडिया” की ओर बढ़े, जहां लोग केवल घूमने नहीं, बल्कि संस्कृति, अध्यात्म, खानपान और जीवन शैली का अनुभव लेने भारत आएँ।

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