राजस्थान से सामने आया एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है, जिसमें विदेशी पर्यटक एक ट्रैक्टर पर तेज आवाज में बज रहे देसी गानों की धुन पर पेट्रोल पंप के भीतर नाचते दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य पहली नज़र में भले मनोरंजक लगे, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से यह गंभीर लापरवाही है। पेट्रोल पंप एक ऐसी जगह है जहां हल्की सी चूक भी बड़े हादसे का रूप ले सकती है। यहां तक कि मोबाइल फोन पर बात करना भी जोखिमपूर्ण माना जाता है। ऐसे में ट्रैक्टर का चलना, ऊँची आवाज में संगीत बजाना और उसके ऊपर खड़े होकर नाचना किसी भी दुर्घटना को निमंत्रण देने जैसा है।

चिंता की बात यह है कि राज्य की उप-मुख्यमंत्री दिया कुमारी ने इस वीडियो को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर “देसी ताल पर विदेशी मुस्कान, यही तो है राजस्थान की शान!” कैप्शन के साथ साझा किया। एक जिम्मेदार सार्वजनिक प्रतिनिधि द्वारा इस तरह की असुरक्षित गतिविधि को प्रशंसा योग्य क्षण की तरह प्रस्तुत करना कई सवाल खड़े करता है। एक तरफ सरकारें लगातार पेट्रोल पंपों पर सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने की बात करती हैं, वहीं दूसरी ओर संवैधानिक पदों पर बैठे नेता स्वयं ऐसे जोखिमभरे वीडियोज़ को प्रोत्साहित करते नजर आते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार पेट्रोल पंप उच्च ज्वलनशील क्षेत्र होते हैं, जहां स्पार्क, स्टैटिक चार्ज, तेज आवाज वाले उपकरण, और अनियंत्रित गतिविधियां तुरंत दुर्घटना को जन्म दे सकती हैं। सिर्फ जवानी का उत्साह या सांस्कृतिक आकर्षण दिखाने के लिए सुरक्षा के नियमों को ‘इग्नोर’ करना समझदारी नहीं कही जा सकती। इससे न सिर्फ पर्यटकों की, बल्कि वहां मौजूद कर्मचारियों और अन्य नागरिकों की जान जोखिम में पड़ जाती है।
कुल मिलाकर, घटना केवल एक वीडियो या सोशल मीडिया पोस्ट का मामला नहीं है। यह हमारी व्यवस्था, हमारे नेतृत्व और हमारी सामूहिक जिम्मेदारी पर प्रश्नचिह्न है। राज्य की ब्रांडिंग जरूरी है, पर्यटन को बढ़ावा देना भी प्रशंसनीय है, लेकिन यह सब सुरक्षा नियमों की अनदेखी करके नहीं किया जा सकता। सार्वजनिक पदों पर बैठे नेताओं का दायित्व है कि वे जनसुरक्षा को सर्वोपरि रखें और ऐसे व्यवहार को बढ़ावा देने के बजाय जागरूकता का संदेश दें।
मौजूदा समय में जब सोशल मीडिया की एक पोस्ट लाखों लोगों तक पहुंचती है, नेताओं द्वारा साझा किए गए कंटेंट का प्रभाव और भी व्यापक हो जाता है। ऐसे में उम्मीद यही की जाती है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता दें और जनता को सही उदाहरण प्रस्तुत करें।










