( अंकित सेन / उजला दर्पण )
जबलपुर।
Zone-02 अब सिर्फ गंदगी और भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि मौत का अड्डा बन चुका है। यहाँ सीएसआई सचिन जैन और एसआई अमन चतुर्वेदी की मनमानी से जनता हर दिन खतरे में जी रही है। सफाई की जगह घोटाला, व्यवस्था की जगह अव्यवस्था और अब कचरा गाड़ियाँ ही लोगों की जान लेने पर उतारू हैं।
कचरा गाड़ियाँ बनीं मौत का पहिया
4 सितंबर को Zone-02 की 4132 नंबर की कचरा गाड़ी ने मौत का रूप धारण कर लिया। नशे में धुत्त ड्राइवर गाड़ी को ऐसे भगाता रहा मानो सड़क उसकी जागीर हो। लोग भागकर किसी तरह बचे, वरना दर्जनों जानें जा सकती थीं। गाड़ी से उड़ते कीचड़ ने राहगीरों को सिर से पाँव तक सन दिया और पूरा इलाका घंटों तक परेशान रहा।
जब इस घटना की शिकायत सीएसआई सचिन जैन से की गई तो उनका चौंकाने वाला जवाब था – “गाड़ियाँ ठेकेदार चलवाता है, हम क्या कर सकते हैं।” यानी जनता की जान खतरे में हो, लेकिन जिम्मेदार अफसर बेफिक्र!
घोटालों की लंबी लिस्ट
Zone-02 में गड़बड़ियों का जाल कोई नया नहीं –
मस्टरोल घोटाला: मैदान में 10 लेबर, कागज़ों में 40 से ज़्यादा।
डीजल-लॉगबुक धंधा: जिसने “मॉल” दिया, उसका हिसाब क्लियर। जिसने नहीं दिया, उसकी खैर नहीं।
सफाईकर्मियों का शोषण: गाली-गलौज, दबाव और अपमान का रोज़ाना सामना।
गली-मोहल्लों की गंदगी: विवेकानंद वार्ड, शहनाई गार्डन और शताब्दीपुरम एफ ब्लॉक महीनों से कचरे और जाम नालियों में डूबे हुए।
अधिकारियों का ढीला रवैया
इस पूरे मामले की शिकायत जब उपायुक्त श्री अयाची जी से की गई, तो उन्होंने तत्काल प्रभाव से सीएसआई सचिन जैन को कॉल करने और जानकारी देने का आश्वासन दिया।
लेकिन दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग की एचओ अंकिता बर्मन का रवैया सवालों के घेरे में है। उजला दर्पण समाचार पत्र (मध्यप्रदेश) के स्टेट हेड द्वारा बार-बार कॉल करने के बावजूद अंकिता बर्मन ने फोन उठाना तक ज़रूरी नहीं समझा। लगातार Zone-02 से जुड़ी खबरों को भी वह नज़रअंदाज़ करती दिख रही हैं।
यह हाल देखकर जनता सवाल पूछ रही है — क्या Zone-02 के एसआई अमन निधि चतुर्वेदी और सीएसआई सचिन जैन पर वास्तव में अंकिता बर्मन मैडम का वरदहस्त है?
जनता का सीधा सवाल
👉 क्या कमिश्नर जबलपुर और उच्च अधिकारी जानबूझकर इस खेल पर चुप हैं?
👉 क्यों अमन चतुर्वेदी वर्षों से एक ही Zone में टिके हैं?
👉 क्यों सीएसआई सचिन जैन जिम्मेदारी से भागते हैं?
👉 और सबसे बड़ा – क्या स्वास्थ्य विभाग भी इस खेल का संरक्षक बन चुका है?
जनता का गुस्सा साफ है —
“कचरा उठाने का ठेका दिया गया था, लेकिन Zone-02 में तो कचरा गाड़ियाँ ही मौत बाँट रही हैं। गंदगी तो फैली ही है, अब जिंदगी भी खतरे में है।”
👉 यह खबर अब केवल भ्रष्टाचार की नहीं, बल्कि अधिकारियों की मिलीभगत और जनता की जान से खिलवाड़ का सबूत बन चुकी है।












