जयपुर, 5 जुलाई 2025 | उजला दर्पण ब्यूरो
जहाँ आमतौर पर नेता जन्मदिन पर शो और शक्ति प्रदर्शन करते हैं, वहीं भाजपा नेता डॉ. रामप्रसाद भड़िया ने अपना जन्मदिन प्रकृति के नाम कर एक अनूठी मिसाल पेश की है। उन्होंने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान से प्रेरित होकर 11,000 पेड़ लगाने का संकल्प लिया और जयपुर के जगतपुरा क्षेत्र में हजारों पेड़ मानव श्रृंखला बनाकर लगाए।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी इस अभियान को समर्थन देते हुए आधिकारिक पोस्टर का विमोचन किया था। डॉ. भड़िया के नेतृत्व में यह आयोजन न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सशक्त कदम है, बल्कि यह समाज के लिए प्रेरणा स्रोत भी बन रहा है।
“प्रकृति सेवा को जन्मदिन समर्पित” – एक नई सोच की शुरुआत
डॉ. रामप्रसाद भड़िया ने अपने जन्मदिन को केवल निजी उत्सव तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे समाज और पर्यावरण के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा:
“हर साल जन्मदिन मनाते हैं, परंतु अब समय आ गया है कि हम अपने जीवन के ऐसे पलों को समाज और प्रकृति की सेवा में लगाएं। वृक्ष ही जीवन हैं, और हर एक पेड़ माँ की ममता जैसा है।”
डॉ. भड़िया के इस संकल्प में उनका मानव सेतु फाउंडेशन और समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े लोग, भाजपा के कार्यकर्ता, युवाओं और महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया।
जगतपुरा से हनुमानगढ़ तक गूंजा प्रकृति सेवा का संकल्प
यह अभियान केवल जयपुर तक सीमित नहीं रहा। प्रदेशभर में फैले मानव सेतु संगठन के सदस्यों ने इसे एक राज्यव्यापी अभियान में बदल दिया।
जयपुर में:
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ग्रीन पार्क योजना, ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी, और जगतपुरा की सड़क के किनारे मानव श्रृंखला बनाकर हजारों पेड़ लगाए गए।
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पेड़ों की सुरक्षा और संरक्षण हेतु स्वयंसेवकों को जिम्मेदारी सौंपी गई।
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लोटस डेयरी सहित कई निजी संस्थानों और स्थानीय नागरिकों ने अभियान में सहयोग किया।
हनुमानगढ़ में:
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मानव सेतु फाउंडेशन के सदस्य धर्मेंद्र ने एक विद्यालय परिसर में 500 पौधे लगाए।
सांगानेर, जयपुर में:
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डॉ. प्रमोद गुप्ता के नेतृत्व में 200 से अधिक पेड़ लगाए गए।
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ग्रीन पार्क योजना पर अतिरिक्त 3400 पौधों का रोपण किया गया।
इस संपूर्ण आयोजन को सार्वजनिक भागीदारी, सरकार के सहयोग, और नेतृत्व की सामाजिक प्रतिबद्धता का उत्तम उदाहरण कहा जा सकता है।
माँ केशरी देवी ने निभाई अहम भूमिका
इस अवसर पर डॉ. भड़िया की माताजी केशरी देवी भी विशेष रूप से अपने गाँव से आकर उपस्थित रहीं। उन्होंने भी पेड़ लगाने के संकल्प में सहयोग किया और बचपन में सीखी प्राकृतिक संसाधनों के प्रति आदरभाव की कहानियाँ साझा कीं।
उनका यह योगदान यह दर्शाता है कि संस्कार और पर्यावरण सेवा साथ-साथ चल सकते हैं, और यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी जुड़ सकता है।
सरकार का सहयोग और प्रशासनिक भागीदारी
डॉ. भड़िया ने बताया कि राज्य सरकार का भरपूर सहयोग रहा। सड़क निर्माण, डिवाइडर की सफाई और उसमें मिट्टी भरवाने जैसे कार्यों में नगर निगम और प्रशासन ने सक्रिय भूमिका निभाई।
“सरकार और समाज जब एक साथ मिलकर काम करते हैं, तभी वास्तविक परिवर्तन संभव होता है। हमें पेड़ लगाने के साथ-साथ उन्हें संरक्षित करने का भी वचन लेना होगा।”
पिछले वर्षों की सेवाएं – एक निरंतर यात्रा
यह पहला मौका नहीं है जब डॉ. रामप्रसाद भड़िया ने जनसेवा को प्राथमिकता दी हो।
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कोरोना काल के दौरान उन्होंने अपने जन्मदिन पर मुफ़्त चिकित्सा शिविर का आयोजन किया था।
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अगले वर्ष ब्लड डोनेशन ड्राइव करवाई जिसमें हज़ारों लोगों ने भाग लिया।
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बीते वर्ष भी उन्होंने पौधारोपण किया था, जिन पेड़ों के अब फल आने लगे हैं।
इस वर्ष का वृक्षारोपण अभियान इन पिछले आयोजनों की कड़ी और विस्तार है, जो अब एक जनांदोलन का स्वरूप ले रहा है।
विशिष्टजन और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति
इस अभियान में विजय पूनिया सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। लालकोठी विधानसभा कार्यालय से वाहनों के काफिले के रूप में निकले कार्यकर्ता और समर्थक सैकड़ों की संख्या में जगतपुरा पहुंचे, जहाँ पेड़ों को रोपित किया गया।
डॉ. रामप्रसाद भड़िया का यह संकल्प और कार्य न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी है, बल्कि यह एक सामाजिक आंदोलन का स्वरूप ले रहा है। “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान को धरातल पर उतारते हुए उन्होंने सिद्ध किया कि व्यक्तिगत उत्सव को सार्वजनिक कल्याण में बदला जा सकता है।
राजनीतिक जीवन में ऐसी पहलें न केवल प्रशंसनीय हैं, बल्कि आवश्यक भी हैं — जहाँ एक नेता जनहित, प्रकृति और समाज की सेवा को अपनी प्राथमिकता बना ले।












