जमीन घोटाला केस में पत्रकार गंगा पाठक और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

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(उजला दर्पण सीनियर रिपोर्टर रामगोपाल सिंह उईके)

नई दिल्ली  मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज होने के बाद पत्रकार गंगा पाठक और उनकी पत्नी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की विशेष याचिका पर सुनवाई करते हुए गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति विनोद चंद्रन की पीठ ने पारित किया।

गौरतलब है कि जबलपुर के चर्चित आदिवासी ज़मीन घोटाले में गंगा पाठक और उनकी पत्नी को आरोपी बनाया गया था। हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि दोनों आरोपी फरार हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।

गंगा पाठक की ओर से अधिवक्ता मनीष क्षीरसागर और रविशंकर यादव ने अदालत में पक्ष रखते हुए बताया कि वे केवल खरीदार हैं और जमीन खरीद के समय उसे सामान्य जाति की ज़मीन समझा गया था। बाद में पता चला कि वह आदिवासी भूमि है। इसके बाद आदिवासी पक्ष ने शिकायत दर्ज कराई। याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि उन्होंने कभी यह दावा नहीं किया कि जमीन उनकी है और न ही किसी रिकवरी की मांग की है।

सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। हालांकि आदेश की कॉपी अभी सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड नहीं हुई है, लेकिन रजिस्ट्री की पुष्टि के अनुसार नोटिस जारी कर दिए गए हैं।

इस मामले में जबलपुर एसडीएम अभिषेक सिंह ठाकुर की जांच के बाद दो एफआईआर दर्ज हुई थीं—तिलवारा थाना में FIR क्रमांक 93/25 और बरेगी थाना में FIR क्रमांक 120/25। IPC की धाराओं 419, 420, 467, 468, 471 और SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था।

गंगा पाठक का कहना है कि वे वर्षों से प्रशासनिक भ्रष्टाचार और सरकारी ज़मीनों पर अवैध कब्जों को उजागर करते रहे हैं और उनकी रिपोर्टों से नाराज़ अधिकारी उन्हें झूठे मामलों में फंसा रहे हैं। उन्होंने इसे पत्रकारिता पर हमला बताया है।सुप्रीम कोर्ट से मिली यह राहत फिलहाल अंतरिम है। अगली सुनवाई अगस्त माह में होगी, जिसमें तय होगा कि उन्हें स्थायी राहत मिलेगी या नहीं।

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