( उजला दर्पण सीनियर रिपोर्टर रामगोपाल सिंह )
जबलपुर आज 18, 19, 20 अगस्त तक तीन दिवसीय ‘जिज्ञासा’ क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य आयुष आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में शिक्षा और ज्ञान को बढ़ावा देना है।
इस सम्मेलन का आयोजन विद्यार्थी कल्याण न्यास, शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय और मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर के सहयोग से हो रहा है, जिसे आयुष निदेशालय, मध्य प्रदेश सरकार का समर्थन प्राप्त है।
सम्मेलन के दौरान विभिन्न सेमिनार और सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनका फोकस भारत की प्राचीन स्वास्थ्य परंपराओं और जन स्वास्थ्य अवधारणाओं पर होगा। जिज्ञासा, जो कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की एक पहल है।
इस कार्यक्रम में देश भर से लगभग 1,500 छात्र, शोधकर्ता, डॉक्टर और शिक्षक भाग ले रहे हैं। इसके अलावा, आयुष और सार्वजनिक स्वास्थ्य के कई जाने-माने विशेषज्ञ भी मौजूद हैं। यह सम्मेलन छात्रों को अपने क्षेत्र के शीर्ष शिक्षाविदों और विशेषज्ञों से सीधे संवाद करने का सुनहरा मौका दे रहा है।
डॉ. आदर्श रावत और माखन शर्मा ने बताया कि सम्मेलन में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से बीएएमएस के छात्र, यूजी और पीजी के विद्यार्थी, डॉक्टर और फैकल्टी सदस्य भाग ले रहे हैं। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को विकसित भारत के दृष्टिकोण से जोड़ना और बढ़ावा देना है।
वैद्य और नाड़ी चिकित्सक भी देंगे सेवाएं
तीन दिवसीय कार्यक्रम में एक मेगा हेल्थकेयर कैंप का भी आयोजन किया है, जहां देश के प्रसिद्ध वैद्य और नाड़ी चिकित्सक अपनी निःशुल्क सेवाएं प्रदान करेंगे। 19 अगस्त को दोपहर 2:30 बजे, एक विशेष सत्र ‘आयुर्वेद संवाद’ होगा।
जिसमें शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और आयुष मंत्रालय के अधिकारी भाग लेंगे। इस सत्र में आयुष नीति निर्माताओं और छात्रों के बीच सीधा संवाद स्थापित होगा, जिसका लक्ष्य पाठ्यक्रम में सुधार और नाड़ी परीक्षण जैसी महत्वपूर्ण प्रथाओं को शामिल करना है।
इस दौरान, पतंजलि योगपीठ, मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, और जिज्ञासा के बीच नाड़ी परीक्षण और प्रशिक्षण को पाठ्यक्रम में जोड़ने के लिए एक समझौता ज्ञापन MOU पर भी हस्ताक्षर किए जाएंगे।











